पट खुलते ही नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उमड़ा सैलाब

 आज नागपंचमी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार धरती के आधार स्तंभ नागदेवों का आज पूजन किया जाता है, हालांकि पर्यावरण संरक्षण के चलते अब घर-घर पिटारी में सर्प और सर्पों का जोड़ा लेकर जाने वाले सपेरों या कालबेलियों की आवाज़ नहीं सुनाई देती लेकिन बारह ज्योर्तिलिंग में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में श्री महाकालेश्वर मंदिर के सबसे ऊपरी भाग में प्रतिष्ठापित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं  ने भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन किए। इस दौरान श्रद्धालु देर रात्रि से ही कतार में लगे रहे और दर्शनों का आनंद लिया। मंदिर में दर्शनों के लिए बीती रात 10.00 बजे से ही लंबी कतार लगी रही।

मंदिर के पट मंगलवार रात्रि 12 बजे खोले गए। इस दौरान महानिर्वाणि अखाड़े के महंत श्री प्रकाश पुरी जी महाराज ने अपने अखाड़े के साधुओं के साथ पूजन किया और फिर वीआईपियों ने दर्शन किया। वीआईपी दर्शन के साथ ही आम श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला प्रारंभ हो गया। दरअसल श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में एक भाग में भगवान नागचंद्रेश्वर का शिवलिंग है तो दूसरे भाग में भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा है। यह प्रतिमा 7 वीं शताब्दी की बताई जाती है।

कहा जाता है कि यह परमारकालीन प्रतिमा नेपाल से भारत लाई गई और इसे श्री महाकालेश्वर मंदिर के इस भाग में प्रतिष्ठापित किया गया। मूर्ति बहुत ही जागृत है। मंदिर को लेकर यह मान्यता भी है कि यहां साक्षात् नागराज का वास है। नागराज पूरे समय मंदिर में रहते हैं जिसके कारण इस मंदिर के पट वर्ष में केवल एक बार ही खोले जाते हैं।

मंदिर में रात्रि में हुए पूजन के बाद आज दिन में करीब 12 बजे शासकीय पूजन हुआ। इस दौरान सरकार के प्रतिनिधियों ने मंदिर में पूजन किया। इस पूजन के बाद दर्शनों का सिलसिला फिर से प्रारंभ हो गया। मंदिर के पट रात्रि 12 बजे बंद होंगे। इस दौरान रात्रि में भी पूजन होगा। जिसके बाद यह मंदिर अगले वर्ष नागपंचमी पर फिर से खोला जाएगा।

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