श्री शिरडी सांईबाबा प्रसादालय से मिटाते हैं श्रद्धालुओं की भूख

श्री शिरडी के सांईबाबा को उनके भक्त बहुत मानते थे। श्री सांई में श्रद्धालुओं की असीम भक्ति थी। सांई भी अपने श्रद्धालुओं से बहुत प्यार करते थे। आज भी सांई बाबा के श्रद्धालु उन पर असीम श्रद्धा रखते हैं। श्री सांई के समाधि में विलीन हो जाने के बाद बाबा आज भी अपने समाधि मंदिर में विराजते हैं यहां बाबा की नियमित आरती और आराधना होती है। साथ ही श्री सांईबाबा के जन्मोत्सव पर उनकी पालकी निकाली जाती है। यहां देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं। जिनके लिए आज भी श्री सांई अपने प्रसादालय से भोजन प्रसादी की व्यवस्था करते हैं। बाबा का आशीर्वाद कहीं श्रद्धालु उदी के तौर पर प्राप्त करते हैं तो कहीं बाबा के लड्डू प्रसाद पाकर श्रद्धालु अभिभूत हो जाते हैं।

तो दूसरी ओर बाबा श्री सांई प्रसादालय के माध्यम से बड़ी दूर से आए अपने श्रद्धालु के पेट की भूख को शांत कर उसे दो पल का विश्राम देते हैं। सांई प्रसादालय में नित्य सुबह और शाम को श्रद्धालु आकर प्रसाद का लाभ लेते हैं यहां श्रद्धालुओं से नाम मात्र का टोकन शुल्क लिया जाता है और उन्हें गुणवत्ता युक्त भरपेट भोजन परोसा जाता है वह भी प्रेम से। दरअसल श्री सांई भी अपने भक्तों के लिए स्वयं द्वारा मांगी गई भिक्षा से इकट्ठा किए गए अन्न को हांडी में पकाकर उन्हें प्रेम से खिलाया करते थे। शिरडी में यही परंपरा आज भी कायम है। हालत ये रहती है कि बाबा के इस प्रसादालय में लोग कतार में लगकर प्रसाद की बांट जोहते हैं।

यह थी साईं बाबा की अंतिम इच्छा
बाबा की पावन धुनि करती हैं, देती है श्रद्धालुओं को असीम शांति

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