लक्ष्मी जी की पानी है कृपा तो शुक्रवार के दिन इस विधि से करें माँ की पूजा, सुख-समृद्धि की होंगी प्राप्ति

कलयुग में माता लक्ष्मी को विशेष महत्व दिया गया है. क्योंकि इसे अर्थप्रधान युग माना गया है. लक्ष्मी जी को सुख समृद्धि की देवी भी कहा गया है. जिन लोगों पर माता लक्ष्मी की कृपा होती है वे खुशहाल जीवन व्यतीत करते हैं. उनके जीवन में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं रहती है. समाज में भी ऐसे लोगों को सम्मान प्राप्त होता है.

शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है. इस दिन विधि पूर्वक माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने से उनका आर्शीवाद प्राप्त होता है. जिससे जीवन के कई प्रकार के कष्ट मिट जाते हैं.

शुक्रवार की पूजा
माता लक्ष्मी की पूजा शाम के समय करना श्रेष्ठ माना गया है. इसलिए लक्ष्मी पूजन का यही समय सर्वोत्तम है. शुक्रवार की शाम को स्नान करने के बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें. पूजा से पूर्व पूजा स्थल को शुद्ध करें. इसके बाद पूजन आरंभ करें. पुष्प, इत्र और मिष्ठान माता को अर्पित करें. इसके बाद मां लक्ष्मी की आरती का पाठ करें. घर में प्रसाद का वितरण करें और घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं.

लक्ष्मी जी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुम को निश दिन सेवत, हर विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता
सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता
कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
जिस घर तुम रहती सब सद्गुण आता
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।

गुप्त नवरात्रि में करे ये उपाय, मनचाही इच्छाओं की होंगी पूर्ति
इस व्रत को करने से होती है संतान की प्राप्ति, जानें-भगवान स्कन्द की पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Check Also

4 जुलाई यानी आज से है आषाढ़ पूर्णिमा व्रत, जाने कथा और पूजा विधि

हिंदी पंचांग के अनुसार, वर्ष के प्रत्येक महीने में पूर्णिमा अथवा चतुर्दशी के दिन पूर्णिमा …