हर साल आषाढ़ मास की पवित्र पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है: धर्म

गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि गुरु ही भगवान के बारे में बताते हैं और भगवान की भक्ति का मार्ग दिखाते हैं। गुरु के बिना ज्ञान की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।

इस दिन गुरु की पूजा का विशेष महत्व होता है। भारत में इस दिन को बहुत श्रद्धा- भाव से मनाया जाता है। धार्मिक शास्त्रों में भी गुरु के महत्व को बताया गया है।

हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 5 जुलाई को पड़ रही है। 5 जुलाई रविवार को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व प्राचीन काल से मनाया जा रहा है। धार्मिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में गुरुकुल में शिष्य इस दिन को बड़े ही श्रद्धा भाव से मनाते थे। इस दिन गुरु की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता था।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा के पावन दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म भी हुआ था। कृष्ण द्वैपायन व्यास संस्कृत के महान विद्वान थे।

हिंदू धर्म में 18 पुराणों का जिक्र है, जिनके रचयिता भी महर्षि वेदव्यास ही हैं। साथ ही वेदों को विभाजित करने का श्रेय भी कृष्ण द्वैपायन व्यास जी को जाता है, जिस वजह से इनको वेदव्यास के नाम से भी जाना जाता है।

महर्षि वेदव्यास जी को आदिगुरु भी कहा जाता है, जिस वजह से गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन का बहुत अधिक धार्मिक महत्व होता है।

गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार गुरु की कृपा से सब संभव हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु व्यक्ति को किसी भी विपरित परिस्थितियों से बाहर निकाल सकते हैं।

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ –  4 जुलाई 2020 को 11बजकर 33 मिनट से

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त – 5 जुलाई 2020 को 10 बजकर 13 मिनट पर

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