श्राद्ध में आखिर क्यों कुत्ते ,गाय और कौए के लिए निकला जाता है निवाला, जानिए…

श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 2 सितंबर से हुई थी श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है श्राद्ध पक्ष से जुड़ी कई मान्यताएं हैं ऐसी ही एक परंपरा है कौए और गाय के लिए भोजन देने कि आज हम आपको बताते हैं इस परंपरा से जुड़े और मनोवैज्ञानिक और धार्मिक पक्ष।

1 कौए पितरों का स्वरूप माना जाता है मान्यता है कि श्राद्ध में कौए को भोजन को को खिलाने से पित्र देवता प्रसन्न होते हैं और श्राद्ध करने वाले को आशीर्वाद देते हैं।

2 ग्रंथों के अनुसार को कौआ यम का प्रतीक है जो दिशाओं का फलित शुभ या अशुभ संकेत बताने वाला होता है इसलिए श्राद्ध का इसे एक अंग इसे भी दिया जाता है।

3 श्राद्ध के भोजन का एक अंश गाय को दिया जाता है क्योंकि धर्म में गाय को वैतरणी से पार लगाने वाली कहा गया है।

4 शिव महापुराण के अनुसार कुत्ते को रोटी खिलाते समय बोलना चाहिए कि यमराज के मार्ग का अनुसरण करने वाले जो श्याम और शबल नाम के दो कुत्ते हैं मैं उनके लिए यह अन्न का भाग देता हूं वह इस भोजन को ग्रहण करें इसे कुकुर बली कहते हैं।

 

जानिए क्या है अंतिम श्राद्ध उचित विधि और मुहूर्त
ये है सर्वपितृ अमावस्या के पांच शुभ मंत्र, जिससे पितृ होते है प्रसन्न

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