जानिए ईसाई समाज में क्यों रखा जाता है 40 दिनों का उपवास, ये है राख लगाने की वजह

ईसाई समाज में 40 दिन का उपवास बुधवार यानी आज से शुरू हो रहा है। इस उपवास की धर्म में काफी अहमियत होती है। इन विशेष दिनों में समाज का लगभग हर व्यक्ति एक समय भोजन करके सात्विक आचरण करता है। यह वक़्त खुद को ईश्वर से जोड़ने और किए गए गुनाहों के प्रायश्चित का होता है। इन खास दिनों की शुरुआत राख बुधवार से होती है। इस दिन पुरोहित सभी लोगों के माते पर राख मलते हैं तथा यह याद दिलाते हैं कि वह मिट्टी हैं और मिट्टी में मिल जाएंगे। मतलब हर किसी को एक दिन ईश्वर के अंश में मिल जाना है।

वही ये 40 दिन का उपवास राख बुधवार से आरम्भ होकर गुड फ्राइडे पर ख़त्म होता है। दरअसल इन दिनों में प्रभु यीशु ने लोगों तक अपने उपदेशों को पहुंचाने से पहले चालीस दिनों तक रेगिस्तान में बिना कुछ खाए ईश्वर से वंदना की थी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ईसाई लोग अपने पापमय जीवन का परित्याग करते हुए, उपवास एवं परहेज के साथ ईश्वर से प्रार्थना करते हुए पवित्र जीवन जीने की कामना करते हैं। 40 दिन के उपवास में पूरा समाज ईश्वर पुत्र यीशु के महान बलिदान पर मनन करते हैं।

प्रभु यीशु ने लोगों को इतना प्यार किया कि उन्होंने खुद को उनके लिए क्रूस पर बलिदान कर दिया। इस पवित्र काल में लोगों को त्याग प्रार्थना तथा भले कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए जिससे वे यीशु के साथ अधिक आत्मीयता से जुड़ सकें, और उनके अनुरूप बनने का प्रयत्न भी करना चाहिए। यीशु ने यह भी कहा है ‘दयालु बनो, जैसे कि तुम्हारा पिता दयालु है’। इस समयावधि में ईसाई समाज अपने धार्मिक तथा आत्मिक क्रियाकलापों के साथ आत्मशुदधि और चरित्र सुधार के लिए भी प्रयास करते हैं। अपनी बुरी आदतों को पीछे छोड़कर, नये परिवर्तन के साथ, अपनी गलतियों के लिए प्रभु यीशु और अन्य बंधुओं से क्षमा मांगते हैं। यीशु के बताये मार्ग को अपनाते हैं। यीशु ने कहा है कि अपने पड़ोसियों को अपने समान प्यार करो। समाज मानता है कि मानवीय प्रेम हमें ईश्वरीय प्रेम से जोड़कर परमात्मा के दर्शन कराता है।

इस दिन है जया एकादशी, जानिए व्रत कथा, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
जानिए क्या है आज का पंचांग, तिथि और शुभ मुहूर्त

Check Also

केसर के ये तीन उपाय सोए हुए भाग्य को करेंगे जागृत, मिलेगा मेहनत का फल

क्या आप दिन-रात एक कर रहे हैं, फिर भी सक्सेस हाथ नहीं लग रही? ऐसा …