भगवान को पसंद है रूद्राक्ष और भस्म !

श्रावण में भगवान शिव की आराधना विशेषतौर पर की जाती है। भगवान शिव का यह मास बेहद प्रिय है। भगवान शिव को विशेषतौर पर श्रावण मास में माना जाता है। श्रावण में भगवान शिव के लिए तरह – तरह से आराधना की जाती है। मान्यता है कि पूरे श्रावण मास में भगवान शिव को जल चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। कुछ वस्तुऐं हैं जो भगवान शिव को बेहद प्रिय है। इनमें रूद्राक्ष काफी महत्वपूर्ण है।

माना जाता है कि रूद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के आंसूओं से हुई है। भगवान शिव भस्म रमाते हैं उन्हें भस्म भी प्रिय है। दरअसल माता सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ को भंग किया था और अपनी आहूति दी थी। इसके बाद शिव वहां पहुंचे थे और उन्होंने माता सती के शव को उठाया व उनके शरीर की भस्म को भी अपने उपर मला था। माता के शव को श्री हरि विष्णु ने सुदर्शन चक्र से विछिन्न कर दिया।

ऐसे में भगवान शिव अपने ध्यान में आए। भगवान शिव को यहीं से भस्म रमाने का विधान है। भस्म को लेकर यह भी माना जाता है कि यह भस्म जीवन के बारे में बताती है कि काया एक दिन ऐसी ही अवस्था में चली जाएगी। जी हां जीवन के समाप्त होने के बाद काया को पंचतत्व में विलीन कर दिया जाता है ऐसे में वह केवल भस्म रह जाता है। गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती होती है। इस भस्म आरती में गोबर के उपलों की भस्म तैयार कर उससे ज्योर्तिलिंग को रमाया जाता है। इसके बाद आरती की जाती है।

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...तो इसलिए खास होते 'ऊँ' आकार के गणेशजी

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