इस वजह से जरूर करना चाहिए आंवले के पेड़ के नीचे भोजन

आप सभी को बता दें कि कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी कहा जाता है जो आज है. जी हाँ, यह मानते है कि इसी दिन मां लक्ष्मी ने भूलोक पर भगवान विष्णु और शिव जी आंवले के रूप में एक साथ पूजा की थी और इसी पेड़ के नीचे बैठकर खाना भी खाया था. ऐसे में कहते हैं कि इस दिन यानी आज के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और खाना खाने से कष्ट दूर हो जाते हैं और धन धनाय में वृद्धि होती है.

कहते हैं कि आज के दिन आंवले के वृक्ष के नीचे खाना बनाकर ब्राह्मणों को खिलाना चाहिए इसके बाद खुद भी वह खाना चाहिए. वहीं ध्यान रहे कि भोजन के दौरान पूर्व दिशा की ओर मुंह करने के बाद ही खाना चाहिए. वहीं शास्त्रों में बताया गया है कि भोजन के समय थाली में आंवले का पत्ता गिरे तो यह बहुत ही शुभ होता है और थाली में आंवले का पत्ता गिरने से यह माना जाता है कि आने वाले साल में व्यक्ति की सेहत अच्छी रहेगी और उसे लाभ ही लाभ होगा. आइए अब जानते हैं इसकी पीछे है कहानी. 

कथा- कहा जाता है आंवले के पेड़ की पूजा और इसके नीचे भोजन करने की प्रथा माता लक्ष्मी ने शुरू की थी वहीं एक कथा के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी भ्रमण करने आई थीं और रास्ते में उन्हें भगवान विष्णु और शिव की पूजा एक साथ करने की इच्छा हुई. ऐसे में उन्होंने विचार किया कि एक साथ विष्णु और शिव की पूजा कैसे हो सकती है, लेकिन तभी उन्हें ख्याल आया कि तुलसी और बेल का गुण एक साथ आंवले में पाया जाता है वह जानती थीं कि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है और बेल भगवान शिव को. इस वजह से उन्होंने आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक चिन्ह मानकर आंवले की वृक्ष की पूजा की और उनकी पूजा से प्रसन्न होकर विष्णु और शिव प्रकट हुए. उसके बाद लक्ष्मी माता ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर विष्णु और भगवान शिव को खिलाया और फिर खुद खाया. इसी के बाद से यह परम्परा शुरू हो गई.

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