माँ शैलपुत्री को खुश करने के लिए जरूर गाये यह आरती

आप सभी को बता दें कि आज से चैत्र नवरात्र शुरू हो गए हैं. ऐसे में नवरात्र के प्रथम दिन शैलपुत्री की पूजा होती है. कहते हैं पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती के स्वरूप में शैलपुत्री अवतरित होती हैं और माता के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का पुष्प होता है. ऐसे में मां शैलपुत्री नंदी नामक वृषभ पर सवार हैं और संपूर्ण हिमालय पर वह विराजमान मानी जाती हैं. कहा जाता है शैलराज हिमालय की पुत्री होने के कारण नवदुर्गा का सर्वप्रथम स्वरूप शैलपुत्री कहलाई जाती है और मां शैलपुत्री घनघोर तपस्या करने वाली और समस्त वन्य जीव-जंतुओं की रक्षक कहलाई गई है. कहते हैं मां के आर्शीवाद के बिना हिमालय पर रहना संभव नहीं. ऐसे में आज आपको माँ शैलपुत्री की आरती करनी चाहिए, जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं.

आरती देवी शैलपुत्री जी की –

शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जयकार।

शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।

पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।

सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।

उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।

श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।

जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।

मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

मां शैलपुत्री जी का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु प्रकृति रूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो

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