शनि ग्रह को कर्म का कारक माना गया: धर्म

कर्म का फल देना शनि के हाथ में ही है इसलिए शनि ग्रह को कर्म का कारक माना गया है. शनि ग्रह को कुंडली में दशम भाव और अष्टम भाव के साथ साथ आजीविका और मृत्यु का कारक माना गया है. यही वजह है कि कुंडली में शनि के शुभ स्थान पर न होने पर व्यक्ति को रोजगार मिलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है. मान्यताओं के अनुसार शनि गलती करने पर दंड देने में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं करते हैं.

 

'दुश्मनियां' त्योहार और मोहब्बत के आड़े नहीं आतीं: होली
मां वैष्णो देवी का मंदिर सबसे खास मंदिरों में से एक: धर्म

Check Also

अमृत की वर्षा : शरद पूर्णिमा पर चांद की रोशनी से पूरी पृथ्वी जगमगा जाती है

इस वर्ष शरद पूर्णिमा 30 अक्तूबर को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन मास …