आठ शक्तिपीठ मंदिर, अष्टविनायक की यात्रा

भगवान गणेश के ये आठ शक्तिपीठ मंदिर और प्राचीन मंदिर है। आठ शक्तिपीठ मंदिरो का इतिहास और पौराणिक महत्व भी है। इन मंदिरो का सबसे बड़ा महत्त्व ये है की ये मंदिर खुद से ही बनी है इसे किसी ने नहीं बनाया है। यहा पर आठ पवित्र मूर्तियों के मिलने के कारण ही अष्टविनायक की यात्रा की जाती है। कहा जाता है की एक हजार किमी पूरा करने के बाद ही भगवान गणेश के 8 रूपों का दर्शन होता है इसे पूरा करने मे 3 दिन का सामय लग जाता है। धार्मिक महत्व के अनुसार ये यात्रा मोरगांव से शुरू कर वहीं आकर समाप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार कहा गया है की अष्टविनायक की यात्रा के दौरान बीच मे घर नहीं जाना चाहिए। जैसा की ये मंदिर पवित्र मूर्तियों के मिलने के क्रम के अनुसार ही इसे अष्टविनायक की यात्रा कहा जाता है इसलिए इसे इसी क्रम मे करना चाहिए।

श्री मयूरेश्वर मंदिर, मोरगांव

अष्टविनायक की यात्रा मोरगांव से शुरू की जाती है और यही समाप्त की जाती है। श्री मयूरेश्वर मंदिर पुणे से करीब 80 किलोमीटर दूर पर स्थित है। इस मंदिर के चारों कोनों में मीनारें है और लंबे पत्थरों की दीवारें हैं। श्री मयूरेश्वर मंदिर के चार द्वार हैं। ये चारों दरवाजे चारों युग प्रतीक है जो द्वापर, त्रेता,सतयुग और कलियुग हैं। श्री मयूरेश्वर मंदिर के द्वार पर नंदी बैल की मूर्ति बनी हुई है और नंदी बैल की मूर्ति का मुंह श्री गणेश की मूर्ति की ओर है।

शास्त्रों के अनुसार प्राचीन काल में जब शिवजी और नंदी इस मंदिर में विश्राम के लिए रुके थे जब नंदी जी ने यहा से जाने को माना कर दिया था। तभी से नंदी बैल की मूर्ति श्री मयूरेश्वर मंदिर के द्वार पर स्थित है।

अष्ट विनायक के और सातों मंदिर ये है। 

सिद्धिविनायक मंदिर, सिद्धटेक
श्री बल्लालेश्वर मंदिर, पाली
श्री वरदविनायक, महाड़
चिंतामणि, थेयुर
श्री गिरजात्मजा, लेनयादरी
विघ्नेश्वर गणपति मंदिर, ओजर
महागणपति मंदिर, रांजणगांव

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