घर में समृद्धि लातीं हैं माँ संतोषी

शुक्रवार देवी शक्ति का वार, जी हां, देवी शक्ति। माना जाता है कि शुक्रवार के दिन देवियों की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि शुक्रवार को देवी शक्ति श्रद्धालुओं की मनोकामना को पूरा करती हैं। इस दिन संतोषी माता का विशेष पूजन किया जाता है। शुक्रवार को संतोषी माँ की पूजा व व्रत करके गुड, चने की दाल का भोग लगाना चाहिए। इस दिन खट्टी चीज़ों को छूना व खाना वर्जित है। गुड व चने, पूजन के बाद गाय को खिला देना चाहिए। संतोषी माता की कथा व्रत करने वालों को सुनना चाहिए।

सिद्ध सदन सुन्दर बदन गणनायक महाराज।
दास आपका हूँ सदा कीजिये जान के काज।
जय शिव शंकर गंगाधर जय जय उमा भवानी।
सिया राम कीजे कृपा हरि राधा कल्याणी।

भक्त बंधुओं और बहिनों, आज एक ऐसी पवित्र वार्ता चरित्र रूप से बता रहे हैं, जिसको श्रद्धापूर्वक मनन करने व सुनने से  सत्गृहस्थ प्राणियों से युक्त घर में हर प्रकार का सुख और संतोष आता है। यह देवी अनेकों रूप वाली बनकर संसार में व्याप्त हो रही है। संसार के सुखों को खोजने वाले लोगों ने बहुत जगह इस देवी का प्रभाव देखा है, लाखों भक्त इस घटघट व्यापी महान शक्ति को भक्तिपूर्वक धारण कर, हर प्रकार से सुखी बन चुके हैं। इस परम महान अलौकिक देवी शक्ति का नाम सच्ची श्रद्धा एवं अन्तः करण का निष्कर्ष स्वाभाविक प्रेम है। जगत के समस्त पदार्थों पर राज्य करने वाली अलौकिक सत्ता का रूप आप अपने नेत्रों से नहीं देख सकेंगे, क्योंकि यह सर्वत्र उपस्तिथ होते हुए भी निराकार और अगोचर है। माता उमा को इसका रूप बताते हुए भगवान शंकर ने कहा है कि, प्रभु को प्रत्यक्ष देखना हो तो अपने ह्रदय के प्रेम में देखो, जब प्रभु के द्वारपाल जय – विजय शाप के कारण रावण, कुम्भकरण हुए, तब उनके अत्याचारों से दुखी होकर देवताओं ने सर्वरक्षक नारायण से प्रार्थना की, कि – हे प्रभु! हमारी रक्षा करो, परन्तु इतने पर भी प्रभु प्रकट नहीं हुए, तब भगवान शंकर ने बताया, दूर क्यों जाते हो, प्रभु को ह्रदय में खोजो।

दोहा – हाज़िर है हर जगह पर प्रेम रूप अवतार। करें देरी एक पल हो यदि सत्यविचार ।
प्रेमी के वश में बंधे, मांगे सोई देत। बात न टालें भक्त कि, परखें सच्चा हेत ।।

संसार में हर प्राणी को चाहिए कि अपनी धारणा को सच्ची बनाकर रखे। प्रेम का यह मूल मंत्र है, मन से यह बात कभी न टले, भगवान प्रेम के वश में हैं, वह स्वामी हैं। हम सेवक हैं, सब काम उन्हीं के वश में है। हम सदा उन्हीं का ध्यान धरें, कुछ मन में भेद नहीं रखें। वह सत्य रूप सब साक्षी हैं, सब जीव उन्हीं के वश में हैं। सूरज में जैंसे है प्रकाश, चन्द्रमा में शीतलता छाये। वायु में जैंसे है प्रवाह, वे ईश व्याप्त सर्वत्र में हैं। अब और ध्यान में मत भटको, बस उन्हीं का ध्यान धरो। प्रभु होवेंगें शीघ्र साकार सब करुणा के रास में है। इसलिए खड़े हो जाओ और सब मिलकर हरि वाणी का गान करो। नारायण अभी प्रकट होंगे। ऐसी ताकत हरि यश में है।

श्री कृष्ण भगवान स्वयं गीता के चतुर्थ अध्याय में बतलाते हैं –

श्रद्धा वाले को ज्ञान मिले, तत्पर इन्द्रिय वाला हो।
पावें जो ज्ञान शीघ्र ही सब सुख शांति नेह निराला हो।।

जानिए भगवान शिव के प्रिय सर्प कुल के बारे में
माँ संतोषी का व्रत सुख , शांति और वैभव का प्रतीक

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