माता लक्ष्मी के 10 प्रसिद्ध मंदिर जहां जाने से आर्थिक संकट हो जाता है समाप्त

धन तेरस पर भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा होती है। उन्हें आयुर्वेद का जन्मदाता और देवताओं का चिकित्सक माना जाता है। भगवान विष्णु के 24 अवतारों में 12वां अवतार धन्वंतरि का था।
धन्वंतरि के जन्म के संबंध में हमें तीन कथाएं मिलती हैं:-
1. समुद्र मन्थन से उत्पन्न धन्वंतरि प्रथम : कहते हैं कि भगवान धन्वंतरि की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुए थी। वे समुद्र में से अमृत का कलश लेकर निकले थे जिसके लिए देवों और असुरों में संग्राम हुआ था। समुद्र मंथन की कथा श्रीमद्भागवत पुराण, महाभारत, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण आदि पुराणों में मिलती है।

2. धन्व के पुत्र धन्वंतरि द्वितीय : कहते हैं कि काशी के राजवंश में धन्व नाम के एक राजा ने उपासना करके अज्ज देव को प्रसन्न किया और उन्हें वरदान स्वरूप धन्वंतरि नामक पुत्र मिला। इसका उल्लेख ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण में मिलता है। यह समुद्र मंधन से उत्पन्न धन्वंतरि का दूसरा जन्म था। धन्व काशी नगरी के संस्थापक काश के पुत्र थे।5. कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर : कोल्हापुर महाराष्ट्र का एक जिला है। कहा जाता है कि यहां स्थित महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण चालुक्य शासक कर्णदेव ने 7वीं शताब्दी में करवाया था। इसके बाद शिलहार यादव ने 9वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण करवाया था।

मंदिर के मुख्य गर्भगृह में देवी महालक्ष्मी की लगभग 40 किलो की प्रतिमा स्थापित है जिसकी लंबाई लगभग 4 फीट की है। कहा जाता है कि यहां की लक्ष्मी प्रतिमा लगभग 7,000 साल पुरानी है।
6. लक्ष्मीनारायण मंदिर : दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से एक लक्ष्मीनारायण मंदिर को मूल रूप में 1622 में वीरसिंह देव ने बनवाया था, उसके बाद पृथ्वीसिंह ने 1793 में इसका जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद सन् 1938 में भारत के बड़े औद्योगिक परिवार बिड़ला समूह ने इसका विस्तार और पुनरुद्धार कराया जिसके बाद इसे बिड़ला मंदिर भी कहा जाता है।
7. इंदौर का महालक्ष्मी मंदिर : इंदौर शहर के हृदयस्थल राजवाड़ा की शान कहे जाने वाले श्री महालक्ष्मी मंदिर के संबंध में कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1832 में मल्हारराव (द्वितीय) ने कराया था। 1933 में यह 3 तलों वाला मंदिर था, जो आग के कारण तहस-नहस हो गया था। 1942 में मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार कराया गया था। वर्तमान में मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार करके इसे भव्य रूप दिया गया है।
8. चौरासी मंदिर : यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के चंबा से 65 किलोमीटर दूर भरमौर जिला नगर में स्थित है। यहां महालक्ष्मी के साथ गणेशजी और नरसिंह भगवान की मूर्ति भी स्थित है। प्राकृतिक वादियों में बसा यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
9. चंबा का लक्ष्मीनारायण का मंदिर : हिमाचल के चंबा में स्थित यह मंदिर पारंपरिक वास्तुकारी और मूर्तिकला का उत्कृष्‍ट उदाहरण है। चंबा के 6 प्रमुख मंदिरों में यह मंदिर सबसे विशाल और प्राचीन है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर राजा साहिल वर्मन ने 10वीं शताब्दी में बनवाया था। यह मंदिर शिखर शैली में निर्मित है।
10. अष्टलक्ष्मी मंदिर : चेन्नई के इलियट समुद्र तट के पास स्थित यह मंदिर लगभग 65 फीट लम्बा और 45 फीट चौड़ा है। मंदिर में देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूप 4 मंजिल में बने 8 अलग-अलग कमरों में स्थापित है। इस मंदिर में देवी लक्ष्मी अपने पति और भगवान विष्णु के साथ मंदिर की दूसरी मंजिल में विराजित है।
धन्वं‍तरि कौन थे जिनकी होती है धन तेरस पर पूजा
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