क्यों कहा जाता है शिव को भूत-प्रेत के देवता

शिव को संहार का देवता कहा गया है। अर्थात जब मनुष्य अपनी सभी मर्यादाओं को तोड़ने लगता है तब शिव उसका संहार कर देते हैं। जिन्हें अपने पाप कर्मों का फल भोगना बचा रहता है वे ही प्रेतयोनि को प्राप्त होते हैं। चूंकि शिव संहार के देवता हैं। इसलिए इनको दंड भी वे ही देते हैं। इसलिए शिव को भूत-प्रेतों का देवता भी कहा जाता है।

दरअसल यह जो भूत-प्रेत है वह कुछ और नहीं बल्कि सूक्ष्म शरीर का प्रतीक है। भगवान शिव का यह संदेश है कि हर तरह के जीव जिससे सब घृणा करते हैं या भय करते हैं वे भी शिव के समीप पहुंच सकते हैं, केवल शर्त है कि वे अपना सर्वस्व शिव को समर्पित कर दें।

साथ ही यह भी सर्वत्र ज्ञात है कि शिव कि जब बारात निकली थी तो उसमे राक्षस और भूत-प्रेत भी शामिल थे और इन्होने जमकर जश्न मनाया था

भगवान् के शिव नामो के उच्चारण मात्र से दूर हो जाते है कष्ट
जन्म कुंडली में शनि देव के अलग - अलग प्रभाव

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