वास्तु उपायों में छिपा है महालक्ष्मी की कृपा का रहस्य, इन बातों का रखें ख्याल

भव्यता और सुख सौख्य के साथ रहने की चाहत हर किसी की होती है. माता महालक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होकर कृपा बरसाती हैं. अक्सर देखने में आता है कि जिन घरों में शुरूआती वर्ष सुखद रहते हैं लेकिन बाद में कठिनाई बढ़ती जाती है. लक्ष्मी जी की कृपा भी कम हो जाती है.

लक्ष्मी जी की कृपा बनाए रखने के लिए घर में कबाड़ और कचरा बिलकुल इकट्ठा न होने दें. गंदगी और नकारात्मक उूर्जा की वस्तुओं को घर से दूर रखें.

पुरानी कागज की तस्वीरों को अच्छे से फ्रेेम करा कर प्रयोग में लाएं. खुली तस्वीरों की लाइफ एक वर्ष से अधिक नहीं होती. धुंधली और रंग उड़ जाने से उूर्जा का स्तर मध्यम हो जाता है. इन्हें साफ सफाई के बाद विसर्जित कर नवीन तस्वीरों को प्रयोग करना चाहिए.

रंग रोगन भी घर का प्रतिवर्ष कराना चाहिए. पेंट की क्वालिटी बहुत अच्छी है तो एक दो वर्ष बढ़ाया जा सकता है. साधारण चूने की पुताई प्रतिवर्ष की जानी चाहिए. उत्तर-पूर्व और पूर्व दिशा में खुले प्रकाश की व्यवस्था और बागीचा रखें. कंटीले कैक्टस जैसे पौधों को प्रयोग न करंे. घर में गमले में उगाए जाने वाले पौधों को ही लगाया जाना बेहतर होता है.

दक्षिण-पश्चिम स्थान भारी ऊंचा और बंद दीवार वाला बनाएं. यह घर मालिक का शयन कक्ष भी होता है. ऐसा होने पर अच्छी नींद और शांति प्राप्त होती है। इससे वह बेहतर निर्णय ले पाता है. लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं.

रसोई का संबंध भोजन से है. भोजन का स्वास्थ्य से है. स्वास्थ्य बेहतर रहने पर लक्ष्मीजी स्वतः प्रसन्न होती हैं. रसोईघर दक्षिण-पूर्व मंे बनाएं. गैस चूल्हा इस प्रकार रखें कि चेहरा पूर्व की ओर रहे। यहां हवा और प्रकाश का प्रबंध रखें.

घर में यहां वहां मिरर न लगाएं. सीमित संख्या में आवश्यक स्थानों पर ही इसका प्रयोग करें. शयन कक्ष में शीशा इस प्रकार लगाएं कि बेड से वह नजर न आए. बेड पर बैठकर शीशे में निहारना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है. इससे भी लक्ष्मीजी अप्रसन्न होती हैं.

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