जानिए महादेव के कुछ रहस्यमयी मंदिरों के बारे में, जंहा प्रतिमा का आकार हो रहा है बड़ा

भारत एक ऐसा देश है जहाँ मंदिर ही मंदिर है। अगर कोई परीक्षा में पास नहीं हो रहा है तो वह मंदिर जाएगा, अगर किसी को अच्छी लड़की, बहू चाहिए तो वह मंदिर जाएगा, अगर कोई ऑपरेशन होने वाला है तो घरवाले मंदिर जाएंगे, अगर कोई बड़ा काम होना है तो लोग मंदिर जाएंगे। इन बातों से समझा जा सकता है कि भारत में मंदिरों का कितना महत्व है। भारत में आपको हर देवी-देवता के मंदिर मिलेंगे। जी दरअसल हिन्दू धर्म के लोग अपने भगवान के मंदिर बनाने के लिए लाखों, करोड़ों रुपए खर्च करते हैं। भारत एक ऐसा देश है जहाँ देवी-देवताओं की पूजा बहुत ही धूम-धाम से की जाती है और कभी -कभी तो जश्न के साथ भी पूजा होती है। यहाँ आपको कई तरह के ऐसे भी मंदिर देखने को मिलेंगे जो बड़े रहस्यमयी हैं। जी हाँ, भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो रहस्यमयी हैं और उनके रहस्य जानने के बाद लोगों के होश उड़ जाते हैं। फिलहाल महाशिवरात्रि आने वाली है। यह पर्व इस बार 11 मार्च को मनाया जाने वाला है। ऐसे में महाशिवरात्रि के आने के पहले हम आपको बताने जा रहे हैं शिव भगवान के कुछ रहस्यमयी मंदिरों के बारे में जिनकी कहानियां और रहस्य आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे।

नेल्लईअप्पार मंदिर- यह मंदिर तमिलनाडु राज्य के तिरुनेलवेली में स्थित है। इस मंदिर में शिव भगवान विराजमान है। इसे 700 ई.पू में बनाया गया था लेकिन आज भी आप इसे देखेंगे तो यह वैसा का वैसा है। यह बहुत खूबसूरत है और इसे देखने वाले इसकी खूबसूरती को ही देखते रह जाते हैं। इस मंदिर में हज़ारों ही नहीं बल्कि लाखों लोग आते हैं और दर्शन करते हैं। यहाँ लोग मुराद मांगने आते हैं और कहा जाता है यहाँ मुराद मांगने से वह जल्द पूरी हो जाती है। वैसे अब बात करें इस मंदिर के रहस्य के बारे में तो वह अनोखा है। जी दरअसल इस मंदिर में जो सबसे आकर्षित करने वाली चीज है वह है इस मंदिर के खंभे। जी हाँ, इस मंदिर के पत्थरों से मधुर संगीत निकलता है जिसे सुनने के बाद लोग हैरान रह जाते हैं। यह इस मंदिर का अनोखा रहस्य है। किसी को भी नहीं पता कि आखिर यह संगीत आता कहाँ से है…? इस संगीत के कारण ही इस मंदिर को संगीत स्तंभ कहते हैं। अगर आप यहाँ के स्तम्भों को छुएंगे तो उनमे से मधुर संगीत की धुन आती है। वैसे इस मंदिर का निर्माण 7वी शताब्दी में पांड्यो ने किया था। वहीं इस मंदिर में जो संगीत खंभे बने हैं उनका निर्माण निंदरेसर नेदुमारन ने किया था जो अपने समय के सबसे श्रेष्ठ शिल्पकार थे। इन सभी खंभों में से सात रंग के संगीत की धुन निकलती है। यहाँ सबसे हैरान करने वाली एक बात और है जो यह है कि यहाँ एक ही पत्थर से 48 खंभे बनाए गए है और सभी 48 खंभे मुख्य खंभे को घेरे हुए हैं। मंदिर में कुल 161 खंभे हैं जिनसे आप मधुर संगीत को सुन सकते हैं। आप एक खंभे को बजाएंगे तो दूसरे में अपने आप कंपन होने लगेगा।

ककनमठ शिव मंदिर – यह मंदिर बहुत ही अनोखा है और मुरैना में स्थित है। जो भी इस मंदिर का नाम लेता है उसका काम झट से पूरा हो जाता है। इस मंदिर के अंदर जो शिवलिंग है उसे मंशापूर्ण शिवलिंग कहा जाता है। इस शिवलिंग को लेकर यह मान्यता है कि पुराने समय में लोग इसकी पूजा-अर्चना कुओं में पानी के लिए करते थे। जी दरअसल यहाँ जो शिवलिंग है वह पत्थरों पर टिका हुआ है इसी के कारण इस शिवलिंग को लोग चमत्कार का नाम देते हैं। यहाँ के लोगों का कहना है यहाँ कोई हादसा नहीं होता क्योंकि गाँव पर शिव जी की कृपा है। वैसे इस मंदिर को लेकर यह भी कहा जाता है कि इसे भूतों द्वारा बनाया गया है। इस मंदिर को एक ही रात में बनाकर खड़ा कर दिया गया था और आज का दिन है यहाँ रात के समय कोई रुकने का नाम नहीं लेता। जी दरअसल भूतों के कारण यहाँ रात में कोई नहीं रुकता। यह मंदिर कंकड़ों से बना हुआ है इस वजह से लोग यह सोचते हैं कि यह कभी भी गिर सकता है हालाँकि आज तक ऐसा हुआ नहीं।

श्री यंगती उमा महेश्‍वरा मंदिर- यह शिव मंदिर केवल शिव जी का ही नहीं बल्कि पार्वती माता का भी है। इस मंदिर में शिव-पार्वती अर्द्धनारीश्‍वर के रूप में स्थापित किये गए हैं। यह आंध्र प्रदेश के कुरनूल में है जो हैदराबाद से 308 किमी और विजयवाड़ा से 359 किमी दूर स्थित है। इस मंदिर में लोग अपनी मुरादे लेकर आते हैं। इस मंदिर की जो अनोखी बात है वह यह है कि यहाँ स्थापित की गई नंदी की मूर्ति हर साल बढ़ती जा रही है। जी हाँ, सुनकर आपको यकीन नहीं हो रहा होगा लेकिन यह सच है। इस बात को केवल आम लोग ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक भी मान चुके हैं। वैज्ञानिकों ने भी यह माना है कि यहाँ स्थित नंदी की मूर्ति का आकार साल दर साल बढ़ता चला जा रहा है। यहाँ के आम लोगों से लेकर वैज्ञानिकों तक का यह कहना है अगर नंदी की प्रतिमा ऐसे ही साल दर साल बढ़ती रही तो एक समय ऐसा आएगा जब मंदिर के खम्भों को हटाना पड़ेगा। मूर्ति का आकार साल दर साल तेजी से बढ़ रहा है और इसे देखने वाले हैरान भी हैं और परेशान भी। आज तक किसी को यह समझ नहीं आया है कि ऐसा क्यों हो रहा है।।।?

मतंगेश्वर मंदिर- यह शिव मंदिर मध्यप्रदेश के खजुराहो में स्थित है और यहाँ जो शिवलिंग है उसे जीवित शिवलिंग कहा जाता है। अब आप सोच रहे होंगे ऐसा क्यों…? तो हम आपको बताते हैं ऐसा क्यों… जी दरअसल इस मंदिर में जो शिवलिंग है उसका आकार लगातार तेजी से बढ़ता चला जा रहा है। सुनकर आपको हैरानी हो रही होगी लेकिन यह सच है। यही वजह है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को जीवित शिवलिंग कहा जाता है। एक बार शिवलिंग की लंबाई 9 फिट मापी जा चुकी हैं और उसके बाद से यह काफी बड़ा हो चुका है। यहाँ रहने वाले लोगों का कहना है कि दिन पर दिन इस शिवलिंग का आकार तेजी से बढ़ रहा है। केवल यही नहीं बल्कि एक अन्य बात भी है जो सभी को हैरान करती है। वह बात यह है कि जितना यह शिवलिंग ऊपर है उतना ही यह नीचे जमीन में भी धंसा हुआ है..! वैज्ञानिकों का कहना है इस मंदिर का आकार हर साल 1 इंच बढ़ जाता है और यह कैसे हो रहा है यह केवल एक रहस्य है जो आज तक नहीं सुलझ पाया है।

कैलाश मंदिर- यह मंदिर मिलेगा आपको महाराष्ट्र के औरंगाबाद में। इस मंदिर ने सभी को हैरानी में डाल रखा है। यह मंदिर इतना अनोखा है कि देखने वालों के मुंह खुले के खुले रह जाते हैं। यह एक ऐसा मंदिर है जिसे नीचे से ऊपर नहीं बल्कि ऊपर से नीचे की तरफ बनाया गया है। सुनकर हैरानी हो रही है ना लेकिन यह सच है। इस मंदिर को वैसे बनाया गया है जैसे खुदाई की जाती है। इस मंदिर को 1900 साल पुराना कहा जाता है और कुछ लोगों का मानना है कि यह 6000 साल से भी अधिक पुराना है। इस मंदिर में जो भी लोग मुराद लेकर आते हैं उनकी मुराद जरूर पूरी होती है।

पशुपतिनाथ मंदिर- यह मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से 3 किलो मीटर दूर उत्तर पश्चिम में बागमती के किनारे देवपाटन गाँव में है और इस मंदिर के भी कई अनोखे रहस्य हैं जो चौकाने वाले हैं। कहा जाता है पशुपतिनाथ मंदिर में जो भी दर्शन करता है उसका जन्म कभी पशुयोनि में नहीं होता। इसके लिए एक नियम भी है जो यह है कि मंदिर में पहले शिवलिंग के दर्शन करें नाकि नंदी के। पशुपतिनाथ मंदिर में जो शिवलिंग है उसे पारस पत्थर कहा जाता है जो लोहे को भी सोने में बदल सकता है। पशुपतिनाथ मंदिर में चार दरवाजे बने हुए हैं और वह चारो ही चांदी से बनाए गए हैं। यहाँ नंदी की जो प्रतिमा है उसे पीतल से बनाया गया है। यह मंदिर दिखने में बहुत सुंदर है और इसके अंदर जाने के बाद शांति का अहसास होता है।

ईश्वरा महादेव मंदिर- जिस शिव मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं यह मध्य प्रदेश राज्य के मुरैना जिले में पहाड़गढ़ में स्थित है। यह मंदिर घने जंगलों में ईसुरा पहाड़ की गुफा में बना है और यहाँ का जो रहस्य है वह चौकाने वाला है। जी दरअसल इस मंदिर के पट रात में बंद कर दिए जाते हैं और अच्छी तरह से साफ़-सफाई के बाद पट को बंद किया जाता है लेकिन सुबह जो दृश्य नजर आता है वह सभी के होश उड़ा देता है। सुबह जब पुजारी मंदिर के पट खोलते हैं तो शिवलिंग का 21 मुखी, 11 मुखी 7 मुखी बेलपत्रों, चावल और फूलों से अभिषेक हुआ रहता है जिसके बारे में कोई नहीं जानता। यह अभिषेक कौन करता है यह एक ऐसा रहस्य है जिससे आज तक पर्दा नहीं उठ पाया है। लोगों का मानना है ईश्वरा महादेव मंदिर में कोई सुबह चार बजे आता है और उसे लोग अदृश्य शक्ति बताते हैं। वही अदृश्य शक्ति यहाँ आकर पूजा करती है और भोलेनाथ का आशीर्वाद लेती है। बारिश के समय यह मंदिर अनोखी सुंदरता अपने अंदर समा लेता है उस दौरान इसे देखकर स्वर्ग जैसा अनुभव होता है। यह मंदिर बड़े ही अनोखे अंदाज में बनाया गया है और इसे देखकर कोई भी मोहित हो जाता है।

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