मासिक शिवरात्रि पर ‘भद्रावास’ योग का हो रहा है निर्माण

वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 06 मई को दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से शुरू होगी और 07 मई को सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर समाप्त होगी। मासिक शिवरात्रि पर निशा काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। अतः 06 मई को मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। साधक 06 मई को शिवजी के निमित्त मासिक शिवरात्रि का व्रत रख सकते हैं।

सनातन पंचांग के अनुसार, 06 मई को मासिक शिवरात्रि है। यह पर्व हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन देवों के देव महादेव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति हेतु शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। शास्त्रों में निहित है कि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव एवं माता पार्वती परिणय सूत्र में बंधे थे। अतः हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही शिव जी की कृपा से अविवाहित जातकों के शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। ज्योतिषियों की मानें तो वैशाख मासिक शिवरात्रि तिथि पर दुर्लभ एवं मंगलकारी भद्रावास का योग बन रहा है। इस योग में शिव जी की पूजा करने से साधक को मनचाहा व्रत प्राप्त होता है। आइए, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-

शुभ मुहूर्त

वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 06 मई को दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से शुरू होगी और 07 मई को सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर समाप्त होगी। मासिक शिवरात्रि पर निशा काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। अतः 06 मई को मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। साधक 06 मई को शिवजी के निमित्त मासिक शिवरात्रि का व्रत रख सकते हैं।

योग

ज्योतिषियों की मानें तो मासिक शिवरात्रि पर प्रीति योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का निर्माण देर रात 12 बजकर 29 मिनट तक है। इसके पश्चात, आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिष प्रीति और आयुष्मान योग को शुभ मानते हैं। इन योग में शिव जी की पूजा करने से साधक के सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।

भद्रावास

ज्योतिषियों की मानें तो वैशाख मासिक शिवरात्रि पर दुर्लभ भद्रावास का योग बन रहा है। इस योग का निर्माण संध्याकाल से हो रहा है, जो निशा काल तक है। इस योग का निर्माण संध्याकाल 05 बजकर 43 मिनट से हो रहा है और देर रात 01 बजकर 09 मिनट तक है। इस दौरान महादेव की पूजा करने से साधक को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होगा। शास्त्रों में निहित है कि भद्रा के स्वर्ग या पाताल में रहने के दौरान पृथ्वी पर समस्त जीवों का कल्याण होता है। यह योग मंगलकारी होता है।

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