सौर पंचांग के अनुसार, यह पोंगल का त्योहार तमिल माह की पहली तारीख को मनाया जाता है। इस पर्व की शुरुआत की शुरुआत भोगी पोंगल से होती है। दूसरे दिन थाई पोंगल पर मनाया जाता है, जो पोंगल का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। असर में यह पर्व प्रकृति का आभार प्रकट करने के लिए मनाया जाता है, जिसमें इंद्र देव और सूर्य देव के साथ-साथ पशु धन की भी पूजा की जाती है।
इस दिन मनाए जाएगा पोंगल
पोंगल का पर्व बुधवार, 14 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है, जो शनिवार 17 जनवरी तक चलेगा। साथ ही इस दिन पर संक्रांति का क्षण शाम 5 बजकर 43 मिनट पर रहेगा।
पोंगल पर्व का महत्व
थाई पोंगल के दिन, एक खुले स्थान पर नए मिट्टी के बर्तन में कच्चे दूध, गुड़ और नई फसल के चावलों को उबालकर खीर बनाई जाती है, जिसे पोंगल ही कहा जाता है। पोंगल बनाते समय, लोग बर्तन में दूध को तब तक उबलने देते हैं, जब तक की वह बर्तन से बाहर न गिरने लगे। इसे सुख-समृद्धि के शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।
सबसे पहले यह खीर सूर्य देव को अर्पित की जाती है और अच्छी फसल के लिए उनका आभार प्रकट किया जाता है। सूर्य देव को पोंगल अर्पित करने के बाद घर के सभी सदस्यों को केले के पत्ते पर पोंगल परोसा जाता है और बड़े ही उत्साह के साथ इसे ग्रहण किया जाता है।
इन दिनों का भी है खास महत्व
थाई पोंगल के अगले दिन मट्टू पोंगल मनाया जाता है। इस दिन मवेशियों को सजाया जाता है तथा उनकी पूजा की जाती है। पोंगल के अंतिम दिन को कानुम पोंगल के नाम से जाना जाता है, जिसे जिसे कन्नुम भी कहते हैं। यह दिन पारिवारिक मिलन का समय माना जाता है।
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