कुंडली में बन रहे हैं तलाक के योग तो हनुमानजी बचा सकते हैं विवाह संजोग

2015_7image_16_25_017123151thumb-llसनातन संस्कृति के मुताबिक मनुष्य जीवन में सोलह संस्कारों को बताया गया है जिसमें सबसे महत्त्वपूर्ण है विवाह का संस्कार। सनातन संस्कृति में शादीशुदा जीवन पति-पत्नी का धार्मिक रूप से इकट्ठे जीवन बिताने का एक सभ्य तरीका है। वैदिक विवाह संस्कार में भावी पति-पत्नी आजीवन साथ रहने और कभी भी एक दूसरे से अलग न होने की कामना रखते हुए पाणिग्रहण संस्कार कर वैदिक अनुष्ठान करते हैं। वैदिक धर्म में विवाह विछेदन अर्थात तलाक की कल्पना भी नहीं जाती। संस्कृत शब्द “विवाह” का अर्थ है उत्तरदायित्व का वहन करना। कुछ लोग दांपत्य जीवन से घोर असंतुष्ट होकर भी आजीवन दुख सहन कर भी अलग नहीं होते। परंतु कुछ लोग अपने दांपत्य में उपेक्षापूर्ण स्थितियों से ही विचलित होकर फैसले लेने हेतु कोर्ट की शरण लेते हैं।
 
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जातक की कुंडली के दूसरे, पंचवें, सातवें, आठवें व बारहवें भाव तथा इनके स्वामी द्वितेश पंचमेश, सप्तमेश, अष्टमेश, द्वादशेश का दांपत्य जीवन में सुख दुख प्रेम व कलह व विघटन हेतु निरीक्षण किया जाता है। इसके अलावा स्त्री हेतु नैसर्गिक कारक ग्रह बृहस्पति व पुरुष हेतु नैसर्गिक कारक ग्रह शुक्र का निरीक्षण किया जाता है। विवाह की दृष्टि से जातक की जन्मकुंडली के वर्गों का निरीक्षण भी किया जाता है इनमे सबसे प्रमुख रूप से नवां वर्ग नवमांश, सतवां वर्ग सप्तमांश, चालीसवां वर्ग ख्वेदामांश का निरीक्षण किया जाता है। विवाह विघटन के निरीक्षण हेतु विशेष रूप से सातवें आठवें बरहवें भाव में उपस्थित विशिष्ट क्रूर व पापी ग्रह जैसे मंगल व सूर्य तथा शनि व राहू की स्थिति को भी देखा जाता है।
 
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार विवाह भंग अर्थात तलाक या विवाह विछेदन योग अर्थात सेपरेशन का परिणाम समुदाय अष्टकवर्ग में भावों द्वारा प्राप्त बिन्दु पर भी निर्भर करता है, इसके साथ-साथ भिन्नाय अष्टकवर्ग में द्वितेश पंचमेश, सप्तमेश, अष्टमेश, द्वादशेश द्वारा प्राप्त अंक, पंचवें, सातवें, आठवें व बारहवें भावों का बल, द्वितेश पंचमेश, सप्तमेश, अष्टमेश, द्वादशेश का इष्ट और कष्ट फल पर भी निर्भर करता है। परंतु सर्वाधिक रूप से इस बात पर निर्भर करता है के सप्तम भाव और सप्तम भाव का स्वामी किस पापी और क्रूर ग्रह से सर्वाधिक रूप से प्रताड़ित है। सप्तम भाव में सूर्य, राहू शनि व मंगल की उपस्थिती या सप्तमेश का नीच या वेधा स्थान में बैठकर पापी व क्रूर ग्रह से पीड़ित होना तलाक या सेपरेशन का कारण बनता है।
 
तलाक के ज्योतिषीय कारण: सातवें भाव में बैठे द्वादशेश से राहू की युति हो तो तलाक होता है। बारहवें भाव में बैठें सप्तमेश से राहु की युति हो तो तलाक होता है। पंचम भाव में बैठे द्वादशेश से राहू की युति हो तो तलाक होता है। पंचम भाव में बैठे सप्तमेश से राहू की युति हो तो तलाक होता है। सातवें भाव का स्वामी और बाहरवें भाव का स्वामी अगर दसवें भाव में युति करता हो तो में तलाक होता है। सातवें घर में पापी ग्रह हों व चंद्रमा व शुक्र पापी ग्रह से पीड़ित हो पति-पत्नी के तलाक लेने के योग बनते हैं। सप्तमेश व द्वादशेश छठे आठवें या बाहरवें भाव में हो और सातवें घर में पापी ग्रह हों तो तलाक के योग बनते है। सातवें घर में बैठे सूर्य पर शनि के साथ शत्रु की दृष्टि होने पर तलाक होता है। 

ज्योतिषशास्त्र में जहां समस्याएं हैं तो साथ-साथ उनके शतप्रतिशत समाधान भी मौजूद हैं। दांपत्य कलह, सेपरेशन और तलाक से मुक्ति पाने का सबसे आसान और सरल समाधान है एकादश रुद्रावतार हनुमान जी। जैसे हनुमानजी ने भगवान राम और सीता माता का मिलन करवाया। उर्मिला व सीता के सुहाग की रक्षा हेतु उन्होंने अपने प्राणों तक के बारे में भी विचार नहीं किया। हनुमान जी ने राम जी की पत्नी सीता हेतु समुद्र तक लांघ लिया जैसे हनुमान जी के कारण ही उत्तर रामायण के अनुसार लव कुश राम सीता पूरा परिवार एकत्रित हो जाता है ठीक उसी तरह शनि, मंगल, राहु और सूर्य की सप्तम भाव में युति के पश्चात् भी हनुमान जी की शरण जाकर दांपत्य जीवन सामान्यतः सुखद सिद्ध हो सकता है। आइए जानते हैं कैसे। 

 
तलाक से मुक्ति पाने हेतु ज्योतिषीय उपाय
 
– घर की उत्तर दिशा में हनुमान जी का वीर रूपक चित्र लगाएं।
 
– दक्षिमुखी हनुमान मंदिर से प्राप्त सिंदूर जीवनसाथी के चित्र पर लगाएं।
 
– राहू के कारण तलाक की स्थिति में सात शनिवार शाम के समय दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में 7 नारियल चढ़ाएं।
 
– राहू के कारण तलाक की स्थिति में सात शनिवार शाम के समय दक्षिणमुखी हनुमान जी की उल्टी सात परिक्रमा लगाएं।
 
– शनि के कारण तलाक की स्थिति में सात शनिवार हनुमान जी के चित्र पर गुड़ का भोग लगाकर काली गाय को खिलाएं।
 
– सूर्य के कारण तलाक की स्थिति में सात रविवार दिन के समय पूर्वमुखी हनुमान मंदिर में 7 कंधारी आनर चढ़ाकर किसी नव दंपति को भेंट करें।
 
– मंगल के कारण तलाक की स्थिति में सात मंगलवार तांबे के लोटे में गेहूं भरकर उस पर लाल चन्दन लगाकर लोटे समेत हनुमान मंदिर में चढ़ाएं।
 
– तलाक टालने हेतु सात मंगलवार 7 लौंग, 7 नींबू, 7 सुपारी, 7 जायफल, 7 मेलफल, 7 सीताफल 7 तांबे के त्रिकोण टुकड़े लाल कपड़े मेंं बांधकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं।
सूर्य के कारण तलाक की स्थिति में सात रविवार दिन के समय पूर्वमुखी हनुमान मंदिर में गुड़ की रोटी व टमाटर के साग का भोग लगाकर किसी वृद्ध दंपति को खिलाएं।
 
– शनि के कारण तलाक की स्थिति में सात शनिवार 7 जैतून, 7 अमरूद, 7 काले जामुन, 7 बेर, 7 बादाम, 7 नारियल, 7 काले द्राक्ष काले कपड़े में बांधकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं।
 
– तलाक की स्थिति को शत प्रतिशत समाप्त करने के लिए एक-एक दाना 12मुखी + 11मुखी + 10मुखी + गौरीशंकर + 8मुखी +7मुखी + 6मुखी रुद्राक्ष प्राण प्रतिष्ठित करवाकर पहनें।
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