मंदिर हो या घर, पूजा के समय क्यों बजाई जाती है घंटी, जानिए इसके पीछे की वजह…

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना जाता है। वेद-पुराणों के अनुसार हिंदुओं के 33 करोड़ देवी देवता माने गए है। सभी देवी देवताओं की पूजा भी अलग ढंग से की जाती है, लेकिन इस सभी की पूजा में जो सामान्य बात होती है वो है घंटी का बजाना। किसी भी देवी या देवता का मंदिर हो उसमें घंटी बजाई ही जाती है। क्या आप जानते हैं कि घंटी बजाने के पीछे धार्मिक कारण होने के साथ-साथ साइंटिफिक कारण भी होते है। चलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मंदिर या घर में पूजा के दौरान घंटी क्यों बजाई जाती है-

घंटी बजाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण 

मंदिर हो या घर, जब पूजा की जाती है तो घंटी बजाई जाती है। दरअसल, इसके पीछे धार्मिक कारण तो हैं ही साथ में इसका हमारे जीवन पर साइंटिफिक असर भी होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाता है। इस कंपन का फायदा ये है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है।

यही कारण है कि जिन जगहों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती रहती है, वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। इसी वजह से लोग अपने दरवाजों और खि‍ड़कियों पर भी विंड चाइम्स लगवाते हैं, ताकि उसकी ध्वनि से नकारात्मक शक्तियां हटती रहें। नकारात्मकता हटने से समृद्धि के द्वार खुलते हैं।

ये हैं धार्मिक कारण

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ऐसा माना जाता है कि घंटी बजाने से देवताओं के समक्ष आपकी हाजिरी लग जाती है। मान्यता अनुसार घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है जिसके बाद उनकी पूजा और आराधना अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है।

सकारात्मक ऊर्जा का होता है संचार

बता दें कि घंटी की मनमोहक एवं कर्णप्रिय ध्वनि मन-मस्तिष्क को अध्यात्म भाव की ओर ले जाती है। मन घंटी की लय और धुन से जुड़कर शांति का अनुभव करता है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में घंटी बजाने से मानव के कई जन्मों के पाप तक नष्ट हो जाते हैं। सुबह और शाम जब भी मंदिर में पूजा या आरती होती है तो एक लय और विशेष धुन के साथ घंटियां बजाई जाती हैं जिससे वहां मौजूद लोगों को शांति और दैवीय उपस्थिति की अनुभूति होती है।

ये है मान्यता

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ऐसी मान्यता है कि जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ, तब जो आवाज गूंजी थी, वही आवाज घंटी बजाने पर भी आती है। दरअसल, घंटी उसी नाद का प्रतीक है। बता दे कि यही आवाज ‘ओंकार’ के उच्चारण से भी जागृत होता है।

 

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