ये हैं प्रमुख यज्ञ, राजा दशरथ को पुत्रेष्ठि यज्ञ से मिली थी संतान

yagya-01_1437907505हिंदू धर्म में यज्ञ की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। धर्म ग्रंथों में मनोकामना पूर्ति व किसी बुरी घटना को टालने के लिए यज्ञ करने के कई प्रसंग मिलते हैं। रामायण व महाभारत में ऐसे अनेक राजाओं का वर्णन मिलता है, जिन्होंने अनेक महान यज्ञ किए थे। देवताओं को प्रसन्न करने के लिए भी यज्ञ किए जाने की परंपरा है। आज हम आपको प्रमुख यज्ञ, उनसे जुड़ा विज्ञान आदि के बारे में बता रहे हैं। जानिए धर्म ग्रंथों में किन यज्ञों के बारे में बताया गया है-

ये हैं प्रमुख यज्ञ
पुत्रेष्ठि यज्ञ- यह यज्ञ पुत्र प्राप्ति की कामना से किया जाता है। महाराज दशरथ ने यही किया था, परिणामस्वरूप श्रीराम सहित चार पुत्र जन्मे। राजा दशरथ का यह यज्ञ ऋषि ऋष्यशृंग ने संपन्न करवाया था।
अश्वमेघ यज्ञ- इस यज्ञ का आयोजन चक्रवर्ती सम्राट बनने के उद्देश्य से किया जाता था। इस यज्ञ में एक राजा अपने घोड़े को अन्य राज्यों की सीमाओं में भेजता था। जिन राज्यों से वह घोड़ा बिना रोके आ जाता था, समझा जाता था कि उस राज्य के राजा ने आत्म समर्पण कर दिया है और जो राजा उस घोड़े को पकड़ लेता था, उसे चक्रवर्ती सम्राट बनने की इच्छा रखने वाले राजा से युद्ध करना पड़ता था। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो सौ बार यह यज्ञ करता था, वह इंद्र का पद प्राप्त करता है।
राजसूय यज्ञ- यह यज्ञ अपनी कीर्ति और राज्य की सीमाएं बढ़ाने के लिए किसी राजा द्वारा किया जाता था। इसके अंतर्गत कोई पराक्रमी राजा स्वयं या अपने अनुयायियों को अन्य राज्यों से कर (धन आदि) लेने भेजता था। जो आसानी से कर दे देता था, उससे मित्रतापूर्वक व्यवहार किया जाता था और जो कर नहीं देता था उसके साथ युद्ध कर उससे जबर्दस्ती कर वसूला जाता था।

विश्वजीत यज्ञ- विश्व को जीतने के उद्देश्य से। सभी कामनाएं पूरी करता है। श्रीराम के पूर्वज महाराज रघु ने किया था।

सोमयज्ञ- सभी के कल्याण की कामना से। आधुनिक युग में सर्वाधिक होते हैं।

पर्जन्य यज्ञ- यह यज्ञ बारिश की कामना से किया जाता है। यह यज्ञ आज भी किया जाता है। इसके अलावा विष्णु यज्ञ, शतचंडी यज्ञ, रूद्र यज्ञ, गणेश यज्ञ आदि किए जाते हैं। ये सभी परंपरा में हैं।

क्यों किए जाते हैं यज्ञ?

ग्रंथों में यज्ञ की महिमा खूब गाई गई है। वेद में भी यज्ञों की संपूर्ण जानकारी है। यज्ञ से भगवान प्रसन्न होते हैं, ऐसा धर्मशास्त्रों में कहा गया है। ब्रह्मा ने मनुष्य के साथ ही यज्ञ की भी रचना की और मनुष्य से कहा इस यज्ञ के द्वारा ही तुम्हारी उन्नति होगी। यज्ञ तुम्हारी हर इच्छा व आवश्यकताओं को पूरी करेगा। तुम यज्ञ से देवताओं को खुश करो, वे तुम्हारी उन्नति करेंगे।

यज्ञ से होने वाले लाभ

धर्म ग्रंथों के अनुसार, यज्ञ के माध्यम से हर मनोकामना पूरी हो सकती है। धन प्राप्ति, कर्मों के प्रायश्चित, अनिष्ट को रोकने के लिए, दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए, रोगों के निवारण के लिए यज्ञ करने का विधान है। देवताओं को प्रसन्न करे तथा धन-धान्य की अधिक उपज आदि के लिए भी यज्ञ किए जाते हैं। गायत्री उपासना में भी यज्ञ आवश्यक है। गायत्री को माता और यज्ञ को पिता कहा गया है। इन्हीं के संयोग से मनुष्य का आध्यात्मिक जन्म होता है।

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