शिव का ही स्वरूप है यह शहर, खास है यहां का ज्योतिर्लिंग

भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ भी हैं। यह शहर की गिनती मोक्ष देने वाली सप्तपुरियों में की जाती है। साथ ही यहां पर देवी सती के इक्यावन शक्तिपीठों में से एक विशालाक्षी देवी भी स्थित है। इन सब कारणों की वजह से वह ज्योतिर्लिंग और यह शहर खुद में ही खास माना जाता है।

kashi_vishwanath_144भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है काशी

कहा जाता है कि इस नगर को खुद भगवान शिव ने अपने तेज से प्रकट किया था। इसलिए यह नगर उन्हीं का स्वरूप माना जाता है। प्रलय से समय इस नगर की रक्षा करने के लिए भगवान शिव ने इसे अपने त्रिशूल पर टिका कर रखा है। 

काशी को माना जाता है पंचकोसी

काशी को भगवान शिव का सबसे प्रिय नगर माना जाता है। कहते हैं यहां खुद भगवान शिव निवास करते हैं। काशी को पंचकोसी यानी कल्याणदायिनी, कर्म बंधन का नाश करने वाली, ज्ञानदायिनी और मोक्ष प्रदान करने वाली माना जाता है।

 

क्यों नहीं छोड़ना चाहिए अपना धर्म?
पहला ज्योतिर्लिंग है सोमनाथ, चंद्रमा ने की थी इसकी स्थापना

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