बचपन में हुई ऐसी घटना जिसने भी सुना वो हैरान रह गया

naagandnanakji_24_11_2015गुरु नानक जी ने धार्मिक कट्टरता के साथ ही भेद-भाव का भी बचपने से ही विरोध करना आरंभ कर दिया था। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण यह है कि भाई मरदाना, जो नानक जी के बचपन के साथी थे। जोकि मुस्लिम परिवार से थे। लेकिन बिना भेद-भाव के वह नानक के साथ रहा करते थे।

देश में या फिर विदेश में जहां भी नानक जी का जाना होता, मरदाना भी उनके साथ ही जाते थे। नानक जी अमूमन खामोश रहते थे। उन्हें देखकर ऐसा लगता था कि वो किसी गहरे चिंतन में हैं।

इसलिए उन्हें पिता कालूराय जी ने पशुओं को चराने का काम सौंपा वह सुबह जाते और शाम को नियत समय पर लौट आते।

एक दिन नानक जी पशुओं को चराने के लिए गए। वहां उनकी नींद लग गई। तभी तलवंडी का शासक राय दुलार उस रास्ते से निकला। उसने देखा एक बालक पेड़ के नीचे सोया हुआ है और उसके पास एक नाग फन फैलाकर बैठा हुआ है। वह नाग अपने फन से उस बालक के चेहरे पर आप रही सूर्य की तेज किरणों को रोक रहा था। पेड़ की छांव जिस और हटती नाग उस और फन कर लेता।

यह देखकर राय दुलार हैरान था। उसने सोचा यह बालक बड़ा होकर जरूर या तो बहुत बड़ा संत बनेगा या सम्राट। बाद में पता चला की यह बालक कालूराय जी का पुत्र है। इस घटना के बारे में जिसने भी सुना वो यह सुनकर हैरान रह गया।

 
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