बाजीराव-मस्तानीः हिंदू योद्धा के लिए मुस्लिम नर्तकी ने कर दिया था खुद को कुर्बान

bajirao-1449483432-300x214बाजीराव मस्तानी एक प्रसिद्घ प्रेमकहानी है। बाजीराव पेशवा इतिहास के प्रसिद्ध योद्धा थे। इस हिंदू मराठा शूरवीर का नाम आज भी लोककथाओं में अमर है। उनका साम्राज्य महाराष्ट्र के पुणे में स्थित था। उनकी पत्नी का नाम काशीबाई था लेकिन बाद में उन्हें मुस्लिम नर्तकी मस्तानी से प्रेम हो गया था।

मस्तानी नृत्य विद्या में ही पारंगत नहीं थी बल्कि उसे तलवारबाजी का भी शौक था और वह इस विद्या में भी एक कुशल तलवारबाज की तरह माहिर थी। इसके अलावा उसे घुड़सवारी में महारत हासिल थी। वह बाजीराव के विभिन्न युद्ध अभियानों में भी शामिल रही।

कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि मस्तानी बुंदेलखंड के एक हिंदू राजपूत राजा छत्रसाल की बेटी थी जिसकी मां मुस्लिम थी। एक बार बाजीराव राजा छत्रसाल से मिले और उसी दौरान वे मस्तानी के इश्क में पड़ गए।

वहीं कुछ इतिहासकारों का कहना है कि बाजीराव पेशवा ने मस्तानी से विवाह किया और वह उनकी दूसरी पत्नी थी। इसी तरह कुछ और कहानियों में बताया गया है कि मस्तानी बाजीराव की विवाहित पत्नी नहीं थी।

मस्तानी ने बाजीराव के बेटे शमशेर बहादुर पेशवा को जन्म दिया लेकिन परंपराओं में ज्यादा यकीन रखने वाले बाजीराव के परिवार ने उसे गद्दी का वारिस नहीं माना। बाजीराव को पहली पत्नी केशीबाई से भी एक बेटा था।

मस्तानी के साथ हुई मुहब्बत का असर राजनीति पर भी हुआ और इसे लेकर उनके परिवार व शासन में कई उतार-चढ़ाव आए। खुद मस्तानी को कई बार नफरत का शिकार होना पड़ा।

मगर इन सबके बावजूद बाजीराव अपने हिंदू मराठा साम्राज्य के विजय अभियान के लिए लड़े गए 47 युद्धों में विजयी हुए। वे साम्राज्य का संचालन अपनी राजधानी पुणे से कर रहे थे। उन्होंने 1730-30 के दौरान शनिवार वाडा महल का निर्माण करवाया जहां वे और उनका परिवार अक्सर रहते थे। उसके नजदीक ही मस्तानी के लिए भी एक स्थान था। उसका नाम मस्तानी महल है।

शनिवार वाडा महल की ईंट 10 जनवरी 1730 को शनिवार के दिन रखी गई थी। उसके पांच दरवाजे हैं। इसका निर्माण 1732 में पुरा हुआ। वर्तमान में यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इतिहासकारों के अनुसार, एक युद्ध अभियान में बाजीराव की अचानक मौत हो गई थी। उस समय उनकी उम्र करीब 40 साल थी। मौत का मुख्य कारण बुखार था।

जब यह खबर मस्तानी तक पहुंची तो वह इस दुख को सहन नहीं कर सकी और उसने आत्महत्या कर ली। लोग आज तक बाजीराव और मस्तानी की यह प्रेमकहानी भूले नहीं हैं। इस प्रेमकहानी ने जहां भारत के इतिहास को प्रभावित किया, वहीं भविष्य भी इससे प्रभावित हुआ। डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ इसी कथा पर आधारित है।

 

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