भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में लिए थे ये तीन अवतार

हमें इन शास्त्रों और ग्रंथों से बहुत सी ऐसी रोचक और रहस्य्मयी बातें मिलती है. जो हमारे जीवन का पथ प्रदर्शित करती है .ये वेदों और ग्रंथों से मिली जानकारी से ही हम अपने जीवन को सद गति प्रदान करते है, हमारे इन वेदों में चार युगों का वर्णन विस्तृर रूप से मिलता है.

शास्त्र कहते है की ब्रह्माजी का एक दिन यानी चार वेदों का समय है। इन चारों युगों में सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग आते हैं। इन सभी युगों में अलग अलग बातों का विस्तृत रूप से वर्णन है . सतयुग के बाद आये इस त्रेतायुग में ही भगवान विष्णु ने अधर्म, अनीति और दुराचार का नाश करने के लिए और सत्य और प्रेम को आगे बढ़ाने के लिए अवतार लिया था.

भगवान विष्णु के ये तीन अवतार क्रमश-

वामन अवतार,परशुराम अवतार और श्रीराम अवतार के नाम से हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों में उल्लेखित हैं। ईश्वर एक हैं बस हर युग में उनके अवतार अलग अलग है. बताया जाता है. की त्रेतायुग में भगवान विष्णु के पांचवें अवतार के रूप में वामन अवतार लिया गया था। पहले चार अवतार क्रमशः मत्स्य, कच्छप, वाराह और नृसिंह थे। वामन अवतार में उन्होंने राजा बलि से तीन पग जमीन मांग कर धरती की रक्षा की थी। छठवां अवतार भगवान ने परशुराम का लिया इसके बाद भगवान श्रीराम के रूप में भगवान विष्णु इस धरती पर जन्मे थे.

वामन अवतार-

भगवान विष्णु का यह वामन अवतार पहला एक ऐसा अवतार था जिसका स्वरूप मानव जैसा था इस अवतार में ये मानव के रूप में ही प्रगट हुए थे . इनका जन्म वामन नाम के ऋषि और माता अदिति के यहाँ हुआ था । वह बौने ब्राह्मण के रूप में जन्‍मे थे। वामन भगवान को दक्षिण भारत में उपेन्द्र के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है की राजा बलि बहुत ही बड़े महादानी राजा थे, उनके दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। यह बात जब वामन भगवान को पता चली तो वह एक बौने ब्राह्मण के वेष में राजा बली के दरवार में पहुंचे और भगवान ने उस राजा बलि से अपने रहने के लिए तीन पग भूमि मांगीं तभी राजा ने उनके द्वारा मांगी गई भूमि के लिए वचन दे दिया इस तरह भगवान ने एक पग में धरती, दूसरे में आकाश अंतिम पग बलि के सिर पर रखा था। जिसके बाद से राजा बलि को मोक्ष प्राप्त हुआ।

परशुराम अवतार-

भगवान विष्ण के छठवें अवतार के रूप में राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका और भृगुवंशीय जमदग्नि के पुत्र के रूप में जन्में थे. इस अवतार में वह भगवान शिव के परम भक्त थे. इन्हें शिव से विशेष परशु (फरसा) प्राप्त हुआ था। इनका नाम तो राम था, किन्तु शंकर द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये परशुराम कहलाते थे.

श्रीराम अवतार-

भगवान विष्णु ने सातवें अवतार के रूप में श्रीराम रूप में जन्म लिया। इनका यह अवतार बहुत ही शांत स्वभाव का था इसमें भगवान में संसार में मर्यादा का पाठ पढ़ाया था अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र के रूप में जन्मे इस रंग रूप को हम मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से भी जानते है .

रविवार को शुभफलदायी है भगवान श्री राम का पूजन
श्री राम ने गर्भावस्था में माता सीता को अयोध्या से किया निष्काषित

Check Also

शनिदेव: भाग्यदेवता को यंत्र से करें खुश, शनि का यंत्र है अत्यंत फलदायी

शनिदेव के उपायों में तेल तिलहन का दान, रत्नों का धारण एवं मंत्र जाप प्रमुखता …