प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने की जरूरत

चुनार। समाज के लोगों को अपने जीवन में प्रभु श्रीरामचंद्र के आदर्शों को उतारने की जरूरत है। श्रीराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए राजगद्दी का त्याग करके चौदह वर्षों के लिए वनवास चले गये। रामलीला हमें यह प्रेरणा देती है कि हम सब श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करें। यह बातें मंगलवार की रात श्री राघवेंद्र रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित 21 दिवसीय रामलीला के 176 वें मुकुट पूजन समारोह के दौरान मुख्य अतिथि पुलिस उप महानिरीक्षक पीयूष श्रीवास्तव ने रामलीला प्रेमियों के बीच कही।

प्रभु श्रीराम के मुकूट पूजन समारोह के विशिष्ट अतिथि काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक श्रीकांत मिश्र ने कहा कि बच्चों में रामत्व की भावना पैदा करने के लिए उन्हें रामायण के बारे में बतलाये और भव्य रामलीला के मंचन को दिखलाए, जिससे वह श्रीराम का आचरण पा सकें। मुकुट पूजन काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक श्री कांत मिश्र के बडे़ भ्राता पं. शशिकांत मिश्र व कमेटी के पुरोहित पं. योगेश पांडेय ने द्वारा कराई गयी। मुकुट पूजन के उपरांत पुलिस उप महानिरीक्षक ने रामलीला के व्यास कैलाशपति त्रिपाठी सरल को माल्यार्पण व रामनामी प्रदान कर उन्हें व्यास गद्दी पर बैठाया और मुकुट पूजन चौपाई शुरू हुई।

तत्पश्चात कमेटी के संरक्षक बचाऊ लाल सेठ व अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, पुलिस उपाधीक्षक सुधीर कुमार व कोतवाल कमलेश पाल को रामनामी व स्मृति चिन्ह भेंटकर उन्हें सम्मानित किया। कमेटी के वरिष्ठ सदस्य शिव प्रसाद कमल ने मुख्य अतिथि को 21 दिनों तक चलने वाली मंचन की संक्षिप्त जानकारी देते हुए रामलीला के 175 वर्ष के सफरनामा को बताया। रामलीला के वयोवृद्ध सदस्य राम किसुन बाबा ने अपने हाथों से तैयार की गई शिवलिंग और तिरंगा झंडा मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों को प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। संचालन पूर्व अध्यक्ष चंद्रहास गुप्ता ने किया।पूजन के दौरान डायरेक्टर अविनाश अग्रवाल, राजबहादुर सिंह, पी.एन. कुशवाहा, प्रदीप रस्तोगी, फूलचंद, गौरीनाथ दीक्षित, गोविंद जायसवाल, श्याम सुंदर शाह आदि रहे।
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