छठव्रतियों ने उदीयमान सूर्य को दिया अर्घ्‍य, सुख-समृद्धि की कामना की

संतान की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए रखे जाने वाला छठ महापर्व की बुधवार सुबह पूरा हो गया। नहाए खाए के साथ शुरू हुआ छठ महापर्व अलसुबह उगते सूर्य को अर्घ्‍य देने के साथ ही समाप्त हो गया।

छठ व्रती महिलाओं ने मंगलवार की शाम डूबते सूरज को अर्घ्‍य देने के बाद निर्जला व्रत पर थी। बुधवार सुबह इस मौके पर राजधानी देहरादून समेत धर्मनगरी हरिद्वार के सभी नदी के घाटों पर भारी भीड़ उमड़ी। छठ व्रती महिलाओं के साथ साथ उनके परिजन भी मौजूद रहे।छठ व्रती महिलाओं को उनके पतियों ने पानी पिलाकर व्रत की समाप्ति कराई। छठ के व्रत के लिए हरिद्वार के गंगा घाटों पर दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के श्रद्धालु भक्त बड़ी संख्या में पहुंचे। प्रशासन ने इस मौके पर अभी गंगा घाटों पर साफ-सफाई और अन्य इंतजाम चाक-चौबंद किए हुए थे।

श्रद्धालु भक्तों ने इस मौके पर आतिशबाजी भी की और छठ मैया के नारे लगाए। गंगा घाटों पर सुबह के वक्त गंगा जी में कमर तक पानी में खड़े होकर छठ व्रती महिलाओं ने भास्कर देवता को प्रणाम किया। साथ ही सूर्य देव को अर्घ्‍य देकर घर की सुख शांति देने की कामना की। इस मौके पर श्रद्धालु भक्तों ने बड़ी संख्या में दान पुण्य ने भी किया।

ऋषिकेश में छठ छठ व्रती महिलाओं ने सूर्य देव को दिया अर्घ्‍य

त्रिवेणी घाट गंगा तट पर बुधवार की अल सुबह से ही महामाई छठ पूजा में बड़ी संख्या में व्रतियों का पहुंचना शुरू हो गया था। छठ पूजा महोत्सव समिति के तत्वाधान में पूरी रात भजन और कीर्तन के साथ श्रद्धालु आतिशबाजी करते रहे। मंगलवार की साए अस्तांचल गामी सूर्य देव को अर्घ्य चढ़ाकर श्रद्धालुओं ने व्रत शुरू किया था। बुधवार की सुबह पानी के भीतर खड़े होकर अपनी मनोकामना को पूर्ण करने की प्रार्थना करने वाली महिलाओं ने उगते सूर्योदय को अर्घ्य चढ़ाकर अपना व्रत पूर्ण किया। 

छठ के रंग में रंगी दिखी द्रोणनगरी, व्रतियों ने डूबते सूरज को दिया अर्घ्य
रामायण और महाभारत के अनुसार जानिए छठ पूजा का महत्व

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