आज आर्द्रा नक्षत्र-प्रीति योग के अद्भुत संयोग, इस विधि से करें पूजा

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हिंदु धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। आज 16 फरवरी को पड़ रही एकादशी को जया एकादशी के रूप में कई जगहों पर लोग मना रहे हैं। माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं।

मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से भूत-प्रेत से मुक्ति मिलती है और सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार खुद भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युद्धिष्ठिर को जया एकादशी व्रत का महत्व बताया था। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। एक मान्यता यह भी है कि जो जया एकादशी का व्रत और विधिवत पूजा करता है उसे भूत, प्रेत, पिशाच जैसी योनियों में नहीं भटकना पड़ता है।

इस बार के जया एकादशी व्रत पर आर्द्रा नक्षत्र और प्रीति योग का विशेष संयोग होने से यह खास हो गया है। सुबह से शुरू होकर शाम 7.05 बजे तक आर्द्रा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा रात 12 बजे तक प्रीति योग रहेगा। मान्यता है कि प्रीति योग के शुभ मुहूर्त में लोगों में आपसी प्यार बढ़ता है और गहरी समझ पैदा होती है, जिससे मतभेद खत्म होता है और लोगों में सुलह की संभावना बनती है।

राहू की शांति के लिए आज का दिन अच्छा

शनिवार को आर्द्रा नक्षत्र पड़ने से आज का दिन और भी शुभ हो गया है। ज्योतिष शास्त्र में आर्द्रा नक्षत्र को राहू का नक्षत्र बताया गया है। इस नक्षत्र में पाप ग्रह राहू की शांति के लिए उपाय किया जाए तो वह विशेष फल देने वाले होता है।

एकादशी पर इस तरह करें पूजा :

पूर्व दिशा की तरफ एक पटरे पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की फोटो को स्थापित करें। धूप दीप जलाएं और कलश स्थापित करें।

भगवान विष्णु को अपने सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, फल, फूल, पान सुपारी, नारियल, लौंग, आंवला आदि अर्पण करें और स्वयं भी पीले आसन पर बैठ जाएं।

अपने दाएं हाथ में जल लेकर अपनी मन की इच्छा पूरी करने के लिए कामना करें और पीड़ित ग्रहों को शांत करने की भी प्रार्थना करें। भगवान विष्णु के सामने संकल्प लें।

पूरा दिन निराहार रहकर शाम के समय जया एकादशी की व्रत कथा सुनें और फलाहार करें।

शाम के समय भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने एक गाय के घी का दीपक जलाएं।

अब दूसरे दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन कराकर तथा दक्षिणा देकर उसके बाद स्वयं खाना खाना चाहिए।

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