रावण को इस वजह से भोलेनाथ ने फेंक दिया था कैलाश पर्वत के नीचे

आप सभी जानते ही होंगे कि रावण भगवान भोलेनाथ का परम भक्त माना जाता है. ऐसे में आज हम आपको भोलेनाथ और रावण से जुडी वह कहानी बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे. जी हाँ, यह कहानी उस समय की है जब शिव भगवान ने रावण को कैलाश से नीचे फेंक दिया. आइए जानते हैं. कथा – रावण शिव का महान भक्त था, और उनके बारे में अनेक कहानियां प्रचलित हैं. एक भक्त को महान नहीं होना चाहिये लेकिन वह एक महान भक्त था.

वह दक्षिण से इतनी लंबी दूरी तय कर के कैलाश आया और वो शिव की प्रशंसा में स्तुति गाने लगा. उसके पास एक ड्रम था, जिसकी ताल पर उसने तुरंत ही 1008 छंदों की रचना कर डाली, जिसे शिव तांडव स्तोत्र के नाम से जाना जाता है. उसके संगीत को सुन कर शिव बहुत ही आनंदित व मोहित हो गये. रावण गाता जा रहा था, और गाने के साथ–साथ उसने दक्षिण की ओर से कैलाश पर चढ़ना शुरू कर दिया. जब रावण लगभग ऊपर तक आ गया, और शिव उसके संगीत में मंत्रमुग्ध थे, तो पार्वती ने देखा कि एक व्यक्ति ऊपर आ रहा था. अब ऊपर, शिखर पर केवल दो लोगों के लिये ही जगह है.तो पार्वती ने शिव को उनके हर्षोन्माद से बाहर लाने की कोशिश की. वे बोलीं, “वो व्यक्ति बिल्कुल ऊपर ही आ गया है”. लेकिन शिव अभी भी संगीत और काव्य की मस्ती में लीन थे. आखिरकार पार्वती उनको संगीत के रोमांच से बाहर लाने में सफल हुईं. और जब रावण शिखर तक पहुंच गया तो शिव ने उसे अपने पैर से धक्का मार कर नीचे गिरा दिया. रावण, कैलाश के दक्षिणी मुख से फिसलते हुए नीचे की ओर गिरा. ऐसा कहा जाता है कि उसका ड्रम उसके पीछे घिसट रहा था और जैसे-जैसे रावण नीचे जाता गया, उसका ड्रम पर्वत पर ऊपर से नीचे तक, एक लकीर खींचता हुआ गया.

अगर आप कैलाश के दक्षिणी मुख को देखें तो आप बीच में से ऊपर से नीचे की तरफ आता एक निशान देख सकते हैं . कैलाश के एक मुख और दूसरे मुख के बीच में अंतर या भेदभाव करना ठीक नहीं है, लेकिन कैलाश का दक्षिण मुख हमें ज्यादा प्रिय है क्योंकि अगस्त्य मुनि कैलाश के दक्षिणी मुख में विलीन हो गये थे. तो ये शायद सिर्फ एक दक्षिण भारतीय पक्षपात है कि हमें कैलाश का दक्षिणी मुख ज्यादा पसंद है, और मुझे लगता है कि ये सबसे ज्यादा सुंदर है. ये सबसे ज्यादा श्वेत भी है क्योंकि वहां बहुत ज्यादा बर्फ है. कई तरीकों से, इस मुख में सबसे ज्यादा तीव्रता है. लेकिन बहुत ही कम लोग हैं जो कैलाश के दक्षिणी मुख की ओर जा सकते हैं. ये बहुत ही दुर्गम है और वहां पहुंचना कम लोगों के लिये संभव है, क्योंकि इसका मार्ग अन्य मुखों की तुलना में बहुत ज्यादा कठिन है और कुछ ख़ास तरह के लोग ही वहां जा सकते हैं.

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