साकल माता देती हैं शीघ्र विवाह का वरदान

यूं तो शुक्रवार को हर देवी की उपासना लाभप्रद होती है लेकिन यदि शुक्रवार को विशेष मंदिरों में दर्शन किए जाऐं तो यह शुभफलदायी होता है। दरअसल शुक्रवार को विधाता माता के दरबार में अर्जी लगाने से कुंवारों का शीघ्र विवाह होता है। कुंवारी कन्याओं और युवकों को जल्द शादी का आशीर्वाद मिलता है। दरअसल यदि मध्यप्रदेश के उज्जैन में श्री हरसिद्धि मंदिर के पीछे प्रतिष्ठापित इस मंदिर में पूजन किया जाए तो जल्द विवाह की कामना पूर्ण होती है, मगर इसके लिए माता के मंदिर में साकल बजाने की परंपरा है।

मंदिर में साकल बजाकर श्रद्धालु माता के द्वार पर दस्तक देते हैं। यही नहीं माना जाता है कि माता के मंदिर में साकल बजाने से मनोकामना पूर्ण होती है। इस मंदिर को साकल माता के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल यहां विधाता माता श्रद्धालुओं के भाग्य में जल्द शादी का विधान लिख देती हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की शादी जल्द होती है। यहां माता को शुक्रवार को चुनरी भी चढ़ाई जाती है। माता के दरबार में श्रद्धालु फूल, प्रसादी, दीप की सामग्री समर्पित करते हैं। खास बात यह है कि यह मंदिर अधिकांशतः बंद रहते हैं।

इस मंदिर में सांकल बजाकर श्रद्धालु अपनी अर्जी लगाते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा अखंड दीप के दर्शन भी किए जाते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा बंद दरवाजे के एक ओर से ही पूजन सामग्री माता को समर्पित कर दी जाती है। बदले में माता श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होने का और जल्द विवाह होने का आशीर्वाद भी देती हैं।

साकल माता देती हैं शीघ्र विवाह का वरदान
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