हर साल 14 जनवरी 2026 को जब देश के कई हिस्सों में मकर संक्रांति मनाई जाती है, उसी समय असम में माघ बिहू का पर्व भी मनाया जाता है। इस समय तक खेतों की फसल कट चुकी होती है और ठंड धीरे धीरे कम होने लगती है। मेहनत के बाद लोगों के लिए यह खुशी मनाने का समय होता है।
क्यों खास है माघ बिहू
माघ बिहू असम के लोगों के जीवन से गहराई से जुड़ा पर्व है। पूरे साल खेतों में मेहनत करने के बाद यह त्योहार लोगों को थोड़ा रुकने और अपनी मेहनत का सुख महसूस करने का मौका देता है। इस दिन लोग प्रकृति और ईश्वर का धन्यवाद करते हैं।
माघ बिहू यह सिखाता है कि काम के साथ साथ खुशी मनाना भी जरूरी है। इसलिए यह पर्व केवल एक घर तक सीमित नहीं रहता। गांव के सभी लोग मिलकर इसे मनाते हैं, एक साथ समय बिताते हैं और आपसी मेलजोल बढ़ाते हैं। यही कारण है कि माघ बिहू को सामूहिक आनंद का पर्व माना जाता है।
उरुका की रात और मेजी की आग
माघ बिहू की शुरुआत उरुका की रात से होती है। यह रात पूरे उत्सव का खास हिस्सा मानी जाती है। इस दिन लोग खेतों या खुले स्थानों पर अस्थाई झोपड़ियां बनाते हैं, जिन्हें भेलाघर कहा जाता है। परिवार, दोस्त और पड़ोसी यहां एक साथ इकट्ठा होते हैं। सभी मिलकर खाना बनाते हैं, खाते हैं और आपस में बातें करते हैं।
ठंड के मौसम में यह साथ बैठना अपनापन और खुशी का एहसास कराता है। अगले दिन सुबह मेजी जलाई जाती है। यह आग पुराने समय की परेशानियों को पीछे छोड़ने और नए साल की अच्छी शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। लोग अग्नि के सामने प्रार्थना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
भोजन में बसता है उत्सव
माघ बिहू को भोगाली बिहू कहे जाने की सबसे बड़ी वजह इसके खास व्यंजन हैं। इस पर्व पर चावल से बने पीठा, लारू और तिल गुड़ से बनी मिठाइयां तैयार की जाती हैं। ये खाने में स्वादिष्ट होने के साथ साथ सर्दी के मौसम में शरीर को ताकत भी देते हैं।
माघ बिहू में सभी लोग मिलकर बैठकर खाना खाते हैं। इस समय कोई अमीर या गरीब नहीं होता। सब एक साथ उत्सव का आनंद लेते हैं। यही मिल बैठकर खाने की परंपरा माघ बिहू की असली पहचान मानी जाती है।
परंपरा से आधुनिकता तक
आज के समय में भी माघ बिहू असम की संस्कृति को जीवित रखता है। शहरों में रहने वाले लोग भी इस पर्व पर अपने गांव जाने का प्रयास करते हैं, ताकि परिवार और परंपराओं से जुड़ सकें। बदलते समय के बीच माघ बिहू यह याद दिलाता है कि अपनी जड़ों को समझना और संभालना जरूरी है।
यह पर्व बताता है कि जब लोग मिलकर रहते हैं, तो समाज मजबूत बनता है। माघ बिहू केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, मेहनत का महत्व और साथ मिलकर जीवन जीने की सीख देने वाला उत्सव है, जो असम की पहचान को आगे बढ़ाता है।
Shree Ayodhya ji Shradhalu Seva Sansthan राम धाम दा पुरी सुहावन। लोक समस्त विदित अति पावन ।।