मां के लिए मोड़ दिया नदी का रुख: आदि शंकराचार्य

7 वर्ष का आयु में संन्यास लेने वाले शंकराचार्य ने मात्र 2 वर्ष की आयु में सारे वेदों, उपनिषद, रामायण, महाभारत को कंठस्थ कर लिया था. शंकराचार्य ऐसे संन्यासी थे जिन्होंने गृहस्थ जीवन त्यागने के बाद भी अपनी मां का अंतिम संस्कार किया.

आसान उपायों से पाएं नवग्रह दोष से मुक्ति
सीता नवमी का महत्व और पूजन विधि: वैशाख मास

Check Also

विवाह पंचमी के दिन निभाई जाती हैं ये रस्में, भक्ति से सराबोर रहता है माहौल

विवाह पंचमी में राम-जानकी विवाह के दौरान कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस …