भगवान गणेश को इस मंत्र के जाप से करें प्रसन्न, ऐसे करें पूजा

चाणक्य ने अपने जीवन काल में ऐसी बहुत सी नीतियों की रचना की है, जिसे कि यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में उतार ले तो उसका भाग्य खुल जाता है और उसका जीवन कठिनाईयों को झेलने के लिए सक्षम हो जाता है। वही यदि आचार्य ने लोगों को सफल होने के लिे बहुत से सुत्रों के बारे में बताया है। इसके अलावा उसके साथ ही उन्होंने कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताया जिनसे व्यक्ति को दूरी बनाकर रखनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने एक ऐसी बात के बारे में बताया है कि किस तरह के व्यक्ति के साथ कैसा आचरण करना चाहिए यानि उसके साथ किस तरह का बर्ताव करना चाहिए। आइए जानते हैं इसी के बारे में विस्तार से-

श्री गणेश की पूजा का विशेष दिन बुधवार माना गया है. इसके साथ ही इस दिन बुध ग्रह की भी पूजा की जाती है. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह अशुभ स्थिति में हो तो बुधवार को गणेश पूजन करने से लाभ मिलता है. बुधवार के स्वामी बुध ग्रह हैं जो बुद्धि के कारक भी माने जाते हैं. वही इस श्री गणेश की मोदक का भोग लगाकर पूजा करने से बुद्धि बढ़ती है और साथ ही सुख-सफलता बनी रहती है.इसके अलावा ऐसे करें गणेश का पूजन-पूजन श्रीगणेश को सिंदूर, चंदन, यज्ञोपवीत, दूर्वा, लड्डू या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद धूप और दीप जलाकर आरती करें.

पूजन में इस मंत्र का जप करें-प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्।तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।।प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्।अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।।गणेश जी की ऐसी मूर्ति घर में लाती है खुशियांमंत्र का अर्थ-मैं ऐसे देवता का पूजन करता हूं, जिनकी पूजा स्वयं ब्रह्मदेव करते हैं. ऐसे देवता, जो मनोरथ सिद्धि करने वाले हैं, भय दूर करने वाले हैं, शोक का नाश करने वाले हैं, गुणों के नायक हैं, गजमुख हैं, अज्ञान का नाश करने वाले हैं. मैं शिव पुत्र श्री गणेश का सुख-सफलता की कामना से भजन, पूजन और स्मरण करता हूं

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