जब भगवान परशुराम ने भगवान श्रीकृष्ण को दे दिया था सुदर्शन चक्र

भ‍गवान विष्‍णु के छठवें अवतार कहे जाने वाले भगवान परशुराम की जयंती बैसाख मास के शुक्‍ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है. आप सभी को बता दें कि इस साल परशुराम जयंती 26 अप्रैल 2020 को है. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कब धर्म की रक्षा के लिए परशुराम जी ने भगवान श्रीकृष्ण को दिया था सुदर्शन चक्र. आइए जानते हैं कहानी.

कथा- भगवान परशुराम के विषय में पुराणों में बताया गया है कि वह चिरंजीवी हैं. जी दरअसल सतयुग से लेकर त्रेता और द्वापर युग में उनकी मौजूदगी की कथा मिलती है. कहा जाता है त्रेतायुग में भगवान राम के विवाह काल में परशुराम महेंद्र पर्वत से आए थे और भगवान राम को शिव धनुष तोड़ने का दंड देना चाहते थे. लेकिन जब उन्हें भगवान राम के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान हुआ तो वह राम को प्रणाम करके चले गए. इस समय भगवान राम ने परशुरामजी को अपना सुदर्शन चक्र भेंट किया और उनसे निवेदन किया कि द्वापर युग में जब उनका अवतार होगा तब उन्हें इसकी जरूरत होगी. जब श्रीकृष्ण ने द्वापर में अवतार लिया तब परशुरामजी ने धर्म की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र सौंप दिया.

इसके अलावा एक अन्य कथा मिलती है भगवान परशुराम और गणेश जी के विवाद की. जी दरअसल भगवान परशुराम अपने भीषण क्रोध के लिए जाने जाते हैं. उनके क्रोध की यह स्थिति थी कि उन्‍होंने एक बार भगवान गणेश को भी युद्ध के लिए भी ललकारा जब गणेशजी ने उन्हें कैलास जाने से रोक दिया. गणेशजी और परशुरामजी में भयंकर युद्ध हुआ. क्रोध में आकर भगवान शिव के फरसे से परशुरामजी ने गणेशजी के एक दांत काट डाले. इसके बाद से ही गणेशजी एकदंत कहलाने लगे.

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