द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर करें ये विशेष आरती

हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के नाम से जाना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत हो या जीवन के संकटों का निवारण, बप्पा का नाम ही काफी है। प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। साल 2026 में फाल्गुन महीने की संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जो आज मनाई जा रही है।

माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आइए बप्पा की विशेष आरती करते हैं, जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।

॥श्री गणेश जी की आरती॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

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