चाणक्य नीति: इन 3 आदतों से बचें, नहीं तो हो सकती है धन की हानि

चाणक्य के अनुसार भौतिक जीवन में धन सभी प्रकार के सुखों का कारक है. इसीलिए लोग धन प्राप्त करने के लिए सात समंदर पार भी जाने के लिए भी तैयार रहते हैं. चाणक्य नीति भी कहती है कि व्यापार में वही व्यापारी सफल होता है जो जोखिम उठाने के लिए तैयार रहता है. इसके लिए चाणक्य सात समुद्र पार भी जाने के लिए कहते हैं. क्योंकि साहसी व्यापारी को सीमाओं में बंधकर नहीं रहना चाहिए. इसका अर्थ ये है कि सफल व्यापारी वही है जो कहीं भी व्यापार के लिए तैयार रहे. लेकिन इसके साथ साथ कुछ बातों का भी ध्यान रखना चाहिए.

चाणक्य मानते हैं कि व्यक्ति में आत्म विश्वास तभी आता है जब उसमें अच्छी आदतें हों. अच्छी आदतें व्यक्ति को साहसी और निडर बनाती हैं. वहीं जिन लोगों के भीतर कुछ भी गलत आदतें होती हैं उनका मनोबल कमजोर रहता है, वे हर कार्य को बहुत डर-डरकर और संकोच से करते हैं. इसलिए व्यक्ति को गलत आदतों से दूर रहना चाहिए. जीवन में यदि सफल होना है तो इन गलत आदतों से हमेशा दूर रहने का प्रयास करना चाहिए-

कभी किसी चीज का लोभ न करें
चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को लोभ यानि लालच से हमेशा दूर रहना चाहिए. लोभ व्यक्ति को कमजोर बनाता है और सदैव गलत कार्य करने के लिए प्रेरित करता है. लालच करने वाला व्यक्ति कभी संतुष्ठ नहीं होता है, उसका चित्त अशांत रहता है और दिमाग में तनाव बना रहता है. जो बाद में बड़ी परेशानी को जन्म देती है. इसलिए लोभ से दूर ही रहना चाहिए. लोभ करने वाले इंसान को लक्ष्मी जी भी पसंद नहीं करती हैं.

झूठ न बोलें
चाणक्य के अनुसार जीवन में यदि सफल होना चाहते हैं तो सच बोलने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि जो लोग झूठ बोलते हैं वे अपनी प्रतिभा का सही प्रयोग नहीं कर पाते हैं और मुसीबतों का सामना करते हैं. झूठ बोलने वाले व्यक्ति का कहीं सम्मान नहीं होता है. ऐसे व्यक्ति को कभी बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाती है.

निंदा रस से दूर रहें
चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति दूसरों की बुराई करता रहता है, वह सदैव परेशान रहता है. ऐसे लोग सदैव निंदारस में डूबे रहते हैं. निदांरस में डूबकर ऐसे व्यक्ति अपना सबकुछ गंवा देते हंै. बुराइयों से दूर रहना चाहिए. बुराई करने से बुराई स्वयं में आ जाती है. जिसका ज्ञान जब होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.

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