रावण ने हनुमान को पकड़ने के लिए जब अक्षय कुमार को भेजा, जानिए कौन थे अक्षय…

रामायण की कथा में जब लंकापति रावण छल से माता सीता का अपहरण कर लेता है तो वह सीता जी को अशोक वाटिका में स्थान देता है. इधर भगवान राम माता सीता की खोज में वन वन भटकते हैं, जहां पर उन्हें हनुमान जी मिलते हैं. हनुमान जी को भगवान राम माता सीता का पता लगाने के लिए लंका भेजते हैं.

सुंदर पर्वत पर स्थिति थी अशोक वाटिका
रावण की सोने की लंका तीन पर्वतों पर बसी हुई थीं. जिसमें से एक पर्वत का नाम सुंदर पर्वत था. इसी पर्वत पर अशोक वाटिका बनी थी जहां पर माता सीता को रावण ने रखा हुआ था. हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए जिस सुंदरकांड का पाठ किया जाता है वो दरअसल इसी सुंदर पर्वत के नाम से जुड़ा हुआ है. जब भगवान राम ने हनुमान जी को सीता जी की खोज के लिए भेजा तो इस पूरे अभियान को तुलसीदास ने

सुंदरकांड नाम दिया.
हनुमान जी जब अशोक वाटिका पहुंचे तो माता सीता को उन्होनें प्रभु राम के बारे में विस्तार से बताया. भगवान राम की खबर माता सीता की सभी चिंताएं जानें लगी. तब उन्होंने हनुमान जी से भोजन करने के लिए कहा.

देखि बुद्धि बल निपुन कपि कहेउ जानकीं जाहु।
रघुपति चरन हृदयँ धरि तात मधुर फल खाहु॥

हनुमान जी माता सीता की आज्ञा पाकर वन में अशोक वाटिक में लगे वृक्षों से फल तोड़ कर खाने लगे. हनुमान जी ने कभी इस वृक्ष पर बैठते तो कभी दूसरे वृक्ष पर. हनुमान जी की इस हरकत को देखक अशोक वाटिका की सुरक्षा में लगे सैनिकों ने हनुमान जी को रोकने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने सभी पराजित कर दिया. तब इसकी सूचना लंकापति रावण को दी गई. तब रावण ने अपने सबसे छोटे पुत्र अक्षय कुमार को हनुमान को पकड़ने का आदेश दिया.

अक्षय कुमार कौन था?
पौराणिक कथाओं के अनुसार अक्षयकुमार रावण का सबसे छोटा पुत्र था. अक्षय युद्धकला में निपुण था. उसके पास आठ घोड़ों वाला स्वर्ण कनकमय रथ था. इस रथ पर सवार होकर अक्षय कुमार हनुमानजी को पकड़ने पहुंच गया. हनुमान जी को देखकर अक्षय कुमार को क्रोध आ गया और उसने हनुमान जी पर तीरों की वर्षा कर दी. हनुमान जी और अक्षय कुमार के बीच भयंकर युद्ध हुआ. अंत में हनुमान जी ने अक्षय कुमार का रथ तोड़ दिया और अंत में अक्षय कुमार की भी मृत्यु हो गई.

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