इस दिन है माघ पूर्णिमा, जानिए स्नान और दान का विशेष महत्व

माघ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान, दान और पूजा का विशेष पुण्य प्राप्त होता है. प्रयागराज में कल्पवास का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन यानि माघी पूर्णिमा पर कल्पवास का समापन होता है. पंचांग के अनुसार माघ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की तिथि 26 फरवरी से आरंभ हो रही है, पूर्णिमा की तिथि का समापन 27 फरवरी को होगा.
स्नान, दान और पूजा का महत्व माघ पूर्णिमा को बहुत ही शुभ दिन माना गया है. धार्मिक कार्यों को करने के लिए इस दिन को अत्यंत शुभ बताया गया है. पौराणिक मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा पर प्रात: काल स्नान करने से रोगों का नाश होता है. दान करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली तमाम बाधाएं दूर होती हैं. इस दिन की जाने वाली पूजा से देवताओं का विशेष आर्शीवाद प्राप्त होता है. वहीं ऐसा भी माना जाता है कि माघी पूर्णिमा पर स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. घर में इस दिन पूजा करने से मिलता है ये है लाभ माघ पूर्णिमा के दिन घर में पूजा और सत्यनारायण की कथा आयोजित करने से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और घर में खुशहाली बनी रहती है. इसके साथ ही गीता और रामायण का पाठ भी शुभ फलों में वृद्धि करने वाला माना गया है. धार्मिक आयोजन करने से घर के सदस्यों की तरक्की होती है. एक सुखद वातावरण का निर्माण होता है. दांपत्य जीवन में भी सुख-शांति बनी रहती है. तिल और काले कंबल का दान माघ पूर्णिमा पर तिल और कंबल का दान अत्यंत शुभ माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु पर तिल चढ़ाने की भी परंपरा है. तिल का सेहत से गहारा नाता है. इसके साथ ही जरूरतमंदों को काले कंबल का दान देने से भी कई तरह की बाधाओं को दूर करता है. माघ पूर्णिमा शुभ मुहू्र्त पूर्णिमा तिथि आरंभ: 26 फरवरी को 15 बजकर 50 मिनट. पूर्णिमा तिथि समाप्त: 27 फरवरी को 13 बजकर 45 मिनट.
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