जानिए आखिर क्यों महाशिवरात्रि की रात में जागरण माना जाता है शुभ

फाल्गुन मास हिंदू पंचांग के मुताबिक वर्ष का अंतिम महीना होता है। इसी माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि आती है। कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन महादेव का उपवास एवं पूजन करने से वे बहुत खुश होते हैं तथा श्रद्धालुओं की हर इच्छा को पूरा करते हैं। वही इस बार महाशिवरात्रि 11 मार्च 2021 को है। हिंदू शास्त्रों में महाशिवरात्रि की पूरी रात जागकर शिव जी की उपासना करने की बात कही गई है। जानते हैं महाशिवरात्रि की रात जागरण के आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक महत्वता के बारे में।
जानिए क्या है धार्मिक महत्व? अगर धार्मिक महत्व की बात करें महाशिवरात्रि की रात्रि को महादेव तथा माता पार्वती के विवाह की रात माना जाता है। इस दिन महादेव ने वैराग्य जीवन से गृहस्थ जीवन की तरफ कदम रखा था। ये रात शिव तथा पार्वती माता के लिए बहुत विशेष थी। कहा जाता है कि जो मनुष्य इस दिन रात में जागरण करके महादेव तथा उनकी शक्ति माता पार्वती की सच्चे मन से आराधना एवं भजन करते हैं, उन श्रद्धालुओं पर महादेव एवं मां पार्वती की खास कृपा होती है। उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन की सारी समस्यां दूर हो जाती हैं। इसलिए महाशिवरात्रि की रात्रि को कभी सोकर गंवाना नहीं चाहिए। वैज्ञानिक महत्व भी जानें:- वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो भी महाशिवरात्रि की रात्रि बहुत विशेष होती है। दरअसल इस रात्रि ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस तरह अवस्थित होता है कि इंसान के अंदर की ऊर्जा प्राकृतिक तौर पर ऊपर की तरफ जाने लगती है। मतलब प्रकृति खुद इंसान को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में सहायता कर रही होती है। धार्मिक रूप से बात करें तो प्रकृति उस रात इंसान को परमात्मा से जोड़ती है। इसका पूरा फायदा लोगों को प्राप्त हो सके इसलिए महाशिवरात्रि की रात्रि में जागरण करने एवं रीढ़ की हड्डी सीधी करके ध्यान मुद्रा में बैठने की बात बताई गई है।
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