होलाष्टक के आरंभ और समाप्ति की जानिए तिथि, नहीं किए जाते हैं ये कार्य

पंचांग के अनुसार इस वर्ष होलाष्टक का आरंभ 22 मार्च से होने जा रहा है. इस दिन फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी. चंद्रमा मिथुन राशि में विराजमान रहेगे. इस दिन आद्र्रा नक्षत्र रहेगा. अन्य ग्रहों की बात करें तो वृष राशि में राहु और मंगल, वृश्चिक राशि में केतु, मकर राशि में गुरू और शनि, कुंभ राशि में बुध और मीन राशि में सूर्य व शुक्र विराजमान रहेंगे.

होलाष्टक का समाप्त होंगे
होलाष्टक का समापन होलिका दहन के दिन होता है. इस वर्ष होलिका दहन 28 मार्च को किया जाएगा. रंगों की होली 29 मार्च को खेली जाएगी. फुलेरा दूजा से होली का आरंभ माना जाता है. 15 मार्च को फुलेरा दूज का पर्व था. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण राधा के साथ फुलों से खेलते हैं. मथुरा और बृज में होली का महोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है.

होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए
मान्यता के अनुसार होलाष्टक में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. वही खरमास भी आरंभ हो चुकें. सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ खरमास का आरंभ हो चुका है. खरमास में मांगलिक कार्यों को करना शुभ नहीं माना जाता है. होलाष्टक के आठ दिनों तक शादी विवाह जैसे कार्य नहीं किए जाते हैं. इसके साथ ही भूमि, भवन और वाहन आदि की भी खरीदारी को शुभ नहीं माना गया है.

होलाष्टक में क्या करना चाहिए
मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान पूजा पाठ का विशेष पुण्य प्राप्त होता है. इस दौरान मौसम में तेजी बदलाव होता है. इसलिए अनुशासित दिनचर्या को अपनाने की सलाह दी जाती है. होलाष्टक में स्वच्छता और खानपान का उचित ध्यान रखना चाहिए. इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए.

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