पारस पीपल का वृक्ष खत्म कर सकता है आपकी अभी परेशानियां, जानिए किस तरह मिलेगा लाभ

अक्सर घर के आसपास या मार्ग  में कहीं न कहीं पीपल का पेड़ तो सामान्य रूप से देखने को मिल ही जाता है, किन्तु क्या आपने कभी पारस पीपल का पेड़ देखा है ? पारस पीपल, पीपल से मिलता-जुलता तो होता है, किन्तु उससे भिन्न होता है। इसका अधिकतर इस्तेमाल तंत्र मंत्र के कार्य सिद्धि के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त पारस पीपल औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ इसका इस्तेमाल कई रोगों से बचाव के लिए करते हैं। यदि आपके घर में धन की कमी चल रही हो, परिवार में व्यक्ति बीमार रहते हों अथवा कोई अन्य परेशानी हो तो पारस पीपल के चंद पत्तों का ज्योतिषीय उपाय आपके घर की कई समस्याओं को दूर कर सकता है। यहां जानिए पारस पीपल के ज्योतिषीय इस्तेमाल के बारे में।

आर्थिक समस्यां दूर करने के लिए: हिंदू शास्त्रों में देवी लक्ष्मी को धन की देवी माना गया है। कहा जाता है कि जिस घर पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है, वहां आर्थिक दिक्कत नहीं होतीं। मां लक्ष्मी, प्रभु श्री विष्णु का ध्यान और उनका पूजन करने से बहुत खुश होती हैं। यदि आपके घर में आर्थिक समस्यां है तो पारस पीपल के 108 पत्तों पर प्रभु श्री विष्णु का नाम या उनका मंत्र लिखें। इसके पश्चात् इन पत्तों को जल में प्रवाहित कर दें। इससे कुछ ही दिनों में धन आगमन के मार्ग खुलने लगते हैं तथा कुछ ही समय में मनुष्य मालामाल हो जाता है।

बीमारी से निजात पाने के लिए: अगर परिवार का कोई व्यक्ति अक्सर बीमार रहता है तथा बहुत उपचार के पश्चात् भी उसकी स्थिति सुधर न रही हो, अथवा फिर कोई दवा काम न कर रही हो, तो ऐसे हालात में उस मनुष्य के हाथ से पारस पीपल के 21 पत्तों पर ऊं हं हनुमतै नमः लिखवाएं तथा उन पत्तों को उसके हाथ से जल में प्रवाहित करवा दें। अगर उस शख्स पर किसी तंत्र, मंत्र या टोटके का प्रभाव होगा, वो भी इससे दूर हो जाएगा।

जल्द विवाह के लिए: जिन व्यक्तियों का गुरु कमजोर है, या नीच राशि में है, जिन व्यक्तियों का बहुत कोशिशों के पश्चात् भी विवाह का योग न बन रहा हो, ऐसे व्यक्तियों को प्रतिदिन पारस पीपल की जड़ में जल देना चाहिए। साथ ही प्रभु श्री विष्णु और बृहस्पति के मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे कुंडली में बृहस्पति की स्थिति बेहतर होती है तथा विवाह के योग बनना आरम्भ हो जाते हैं।

कैसे पहचानें पारस पीपल: पारस पीपल सामान्य रूप से जंगलों में पाया जाता है। इसके पत्ते देखने में पीपल जैसे लगते हैं, किन्तु नजदीक से देखने पर ये पीपल के पत्तों से भिन्न दिखाई देंगे क्योंकि इसकी गोलाई पीपल के पत्तों से अधिक होती है। इसके अतिरिक्त ये पेड़ पीपल के वृक्ष जितना भव्य नहीं होता। पारस पीपल में पीले रंग के फूल भी आते हैं।

इस दिन है नरसिंह द्वादशी, जानिए कथा
भारत के इन मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश पर है रोक, महिलाओं के लिए रखा जाता है उपवास

Check Also

शनिदेव: भाग्यदेवता को यंत्र से करें खुश, शनि का यंत्र है अत्यंत फलदायी

शनिदेव के उपायों में तेल तिलहन का दान, रत्नों का धारण एवं मंत्र जाप प्रमुखता …