प्रभु राम जब आए अयोध्या, घी के दीये से किया प्रकाश

lordramachandrareturn_06_11_2015प्रकाशोत्सव दीपावली भारत का एक मुख्य त्योहार है। इस दिन लोग हर्षोल्लास के रंग में सराबोर रहते हैं। घरों की साफ-सफाई से लेकर घरों के बाहर रोशनी और दीपकों से घर को सुंदर बनाते हैं। यह त्योहार एकता और समृद्धि का सूचक है।

घर में समृद्धि की देवी लक्ष्मी का प्रवेश हो इसलिए इस दीपावली के दिन लोग घरों के बाहर रंगोली बनाते हैं। फूलों से घर को सजाते हैं। शाम होते ही शुरू होती है हर जगह पटाखों की गूंज। पटाखे चलाना यानी अपनी खुशी का इजहार धूम-धाम से किया जाता है। इस दिन गणेश जी, मां लक्ष्मी, सरस्वती और कुबेर का पूजन करने के बाद मिठाइयों से एक दूसरे का मुंह मीठा कराया जाता है।

पांच दिनों तक चलने वाला यह पूरा उत्सव खुशियों से सराबोर रहता है। घर के आगे प्रकाश रूप दिए जलाने का बहुत महत्व है। उजाले में नकारात्मक ताकतें प्रवेश नहीं करतीं। उजाला सकारात्मकता का प्रतीक है। दीपावली उत्सव मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाओं का उल्लेख हमारे धर्म ग्रंथों में मिलता है। यह हिंदू धर्म का मुख्य और भव्य त्योहार माना जाता है।

भगवान श्रीराम की कहानी: भगवान श्रीराम अयोध्या के राजा थे। वह भगवान विष्णु के मानव अवतार के रूप में जन्मे थे। श्रीराम की संपूर्ण जीवन गाथा रामायण में उल्लेखित है। कैकेयी को पिता ने वचन दिया, इसलिए श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी को 14 वर्ष के वनवास पर जाना पड़ा।वनवास के दौरान ही रावण ने सीता जी का अपहरण कर लिया था। श्रीराम ने रावण से युद्ध कर उसे मार दिया, उस दिन को वर्तमान में दशहरे के रूप में मनाते हैं। इसके बाद जब श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता जी के साथ अयोध्या आए तो अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए।

क्योंकि वे रावण रूप बुराई को जीत कर और अपने वचन का पूरी तरह पालन करके अयोध्या आए थे। तभी से दीपावली का त्योहार मनाया जाने लगा।

 
 
 
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