हर वर्ष वसंत पंचमी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। वसंत पंचमी के अवसर पर घरों, मंदिरों, शिक्षण संस्थानों, स्कूलों और कॉलेजों में सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का अवतरण हुआ था, इसलिए इस तिथि पर उनकी विधि-विधान से आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है।
इस वर्ष वसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026 को मनाया जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जा रही है। यह शुभ दिन पूजा-पाठ और भोग अर्पण के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। ऐसे में यदि मां सरस्वती को उनके प्रिय भोग अर्पित किए जाएं तो वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं और साधक के जीवन से शिक्षा, नौकरी और करियर से जुड़ी बाधाएं दूर करती हैं।
सरस्वती पूजा में लगाए जाने वाले भोग
केसर भात
वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करने के बाद उन्हें केसर युक्त भात का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
मीठे चावल
इस शुभ दिन पर मां सरस्वती को मीठे चावल का भोग भी लगाया जाता है। चावल में गुड़ या मिश्री मिलाकर प्रसाद तैयार किया जा सकता है। ऐसा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है और पढ़ाई में आ रही परेशानियां दूर होती हैं।
बेसन के लड्डू
मां सरस्वती को बेसन के लड्डू अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस भोग को लगाने से लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आती है और सफलता के योग बनते हैं।
पीली मिठाई
वसंत पंचमी के अवसर पर पीले रंग की मिठाई का भोग लगाने का विशेष महत्व है। धार्मिक विश्वास है कि इससे व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
वसंत पंचमी का महत्व
वसंत पंचमी को भारत में वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन प्रकृति में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है। पीले रंग का विशेष महत्व होता है, जो ज्ञान, उत्साह और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि यदि वसंत पंचमी के दिन सच्चे मन और श्रद्धा भाव से मां सरस्वती की उपासना की जाए तो व्यक्ति की बुद्धि प्रखर होती है, एकाग्रता बढ़ती है और शिक्षा व करियर से जुड़ी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
Shree Ayodhya ji Shradhalu Seva Sansthan राम धाम दा पुरी सुहावन। लोक समस्त विदित अति पावन ।।