आइए जानते हैं मकर संक्रान्ति, लोहड़ी व पोंगल का संबंध

आप सभी को बता दें कि दक्षिण भारत में तमिल हिंदु पोंगल का त्यौहार बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. ऐसे में इस साल यानी 2019 में पोंगल 14 से 18 जनवरी तक मनाया जाने वाला है. पोंगल का त्यौहार संपन्नता और समृद्धि का प्रतीक होता है और पोंगल त्यौहार में वर्षा, धूप और खेतिहर मवेशियो की आराधना की जाती है. कहते हैं तमिलनाडु में पोंगल के दिन सरकारी अवकाश होता है और पोंगल और मकर संक्रान्ति में संबंध भी बहुत गहरा हैं. तो आइए आज जानते हैं मकर संक्रान्ति, लोहड़ी व पोंगल का संबंध.

आप सभी जानते ही हैं कि 14 जनवरी के दिन उत्तर भारत में मकर संक्रान्ति का त्यौहार मनाया जाता है. वहीं गुजरात और महाराष्ट्र में मकर संक्रान्ति को उत्तरायन कहते हैं और पंजाब में इस लोहड़ी के नाम से मनाया जाता है. कहते हैं इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है जिसका स्वागत किया जाता है वहीं सूर्य को अन्न धन का भगवान के लिए यह त्यौहार चार दिन तक मानाया जाता है. दक्षिण भारत में इस त्यौहार को पोंगल के नाम से पुकारते हैं लेकिन क्यों यह भी हम आपको बता दें.

जी दरअसल मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव को जो प्रसाद अर्पित किया जाता है वह पगल कहलाता है तमिल भाषा में पोंगल का एक अर्थ अच्छी तरह उबालना है इस तरह सूर्य देव उबाल कर प्रसाद का भोग लगाते हैं. आप सभी को बता दें कि पोंगल का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह तमिल में महीने की पहली तारीख होती है. कहते हैं पोंगल का त्योहार चार दिनों तक मानाया जाता है. हर दिन पोंगल का अलग अलग नाम होता है. वहीं इस त्यौहार को मनाने के लिए लोग बहुत ही ज्यादा उत्साहित नजर आते हैं.

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इस वजह से मकर संक्रांति को बनाते हैं खिचड़ी और तिल के पकवान

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