इस तरह श्री राम हो गए थे शबरी के राम

आप सभी को यह बात पता ही होगी कि भगवान श्री राम को शबरी के राम के कहा जाता था लेकिन बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ है कि आखिर ऐसा क्यों? आइए आज हम आपको बताते हैं इसके बारे में पौराणिक कथा. उस कथा को जानने के बाद आप समझ जाएंगे कि आखिर क्यों श्री राम कहलाये थे शबरी के राम.

पौराणिक कथा – शबरी एक आदिवासी भील की पुत्री थी. देखने में बहुत साधारण पर दिल से बहुत कोमल थी. इनके पिता ने इनका विवाह निश्चित किया लेकिन आदिवासियों की एक प्रथा थी की किसी भी अच्छे कार्य से पहले निर्दोष जानवरों की बलि दी जाती थी. इसी प्रथा को पूरा करने के लिए इनके पिता शबरी के विवाह के एक दिन पूर्व सौ भेड़ बकरियां लेकर आए. शबरी को जब पता चला तो वह वह इन पशुओं को बचाने की जुगत लगाने लगी. एकाएक शबरी के मन में ख्याल आया और वह सुबह होने से पूर्व ही घर से भागकर जंगल चली गई, जिससे वो उन निर्दोष जानवरों को बचा सके.

शबरी भली भांति पता था कि एक बार इस प्रकार जाने के बाद वह कभी अपने घर वापसी नहीं कर पाएगी लेकिन उसने पहले उने भेड़-बकरियों के बारे में सोचा. अकेली शबरी जंगल में भटक रही थी, तब उसने शिक्षा प्राप्ति के उद्देश्य से कई गुरुवरों के आश्रम में दस्तक दी, लेकिन शबरी तुच्छ जाति की थी, इसलिये उसे सभी ने धुत्कार के निकाल दिया. अंत में मतंग ऋषि के आश्रम में शबरी को शिक्षा मिली. मतंग ऋषि शबरी की गुरु भक्ति से बहुत प्रसन्न थे. देह छोड़ने से पहले मतंग ऋषि शबरी को आशीर्वाद दिया कि एक भगवान राम स्वयं शबरी से मिलने आएंगे. उस दिन उसका उद्धार होगा और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी. एक दिन शबरी आश्रम के पास के तालाब में जल लेने गई, वहीं, पास में एक ऋषि तपस्या में लीन थे.

जब उन्होंने शबरी को जल लेते देखा तो उसे अछूत कहकर उस पर एक पत्थर फेंक कर मारा और उसकी चोट से बहते रक्त की एक बूंद से तालाब का सारा पानी रक्त में बदल गया. ऋषि ने लाखों जतन किए उसमे गंगा, यमुना सभी पवित्र नदियों का जल डाला गया लेकिन रक्त जल में नहीं बदला.कई वर्षों बाद, जब भगवान राम सीता की खोज में वहां आये तब वहां के लोगों ने भगवान राम से आग्रह किया कि वे तालाब के रक्त को जल में बदल दें. भगवान राम ने ऋषि से तालाब क इतिहास पूछा तब ऋषि ने शबरी और तालाब की कथा उन्हें सुनाई. भगवान राम ने दुखी होकर कहा, हे गुरुवर, यह रक्त उस देवी शबरी का नही मेरे ह्रदय का है जिसे आपने अपने अपशब्दों से घायल किया है. भगवान राम का नाम सुनते ही शबरी दौड़ी चली आती हैं.

‘राम मेरे प्रभु’ कहती हुई जब वो तालाब के समीप पहुंचती है तब उसके पैर की धूल तालाब में चली जाती है और तालाब का सारा रक्त जल में बदल जाता है. तब भगवान राम कहते हैं, देखिये गुरुवर शबरी के पैरों की धूल से रक्त जल में बदल गया. शबरी भगवान राम को अपने आश्रम लाती हैं. साथ ही बाग से बेर लाकर चख-चखकर सबसे मीठे बेर अपने प्रभु राम के लिये चुनती हैं. भगवान राम भी बहुत प्रेम से उन बेरों खाने लिए उठाते हैं, इसी बीच लक्ष्मण उन्हें रोककर कहते हैं, भ्राता ये बेर जूठे हैं. तब राम कहते हैं, लक्ष्मण यह बेर जूठे नहीं सबसे मीठे हैं, क्यूंकि इनमे प्रेम हैं और वे बहुत प्रेम से उन बेरों को खाते हैं. मतंग ऋषि का कथन सत्य होता है और देवी शबरी को मोक्ष की प्राप्ति होती है. और इस तरह भगवान राम, शबरी के राम कहलाए.

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