मंदिर जहां हुआ शिव-पार्वती जी का विवाह: रुद्रप्रयाग

‘त्रियुगी नारायण’ एक पवित्र जगह है, माना जाता है कि सतयुग में जब भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था तब यह ‘हिमवत’ की राजधानी था. इस जगह पर आज भी हर साल देश भर से लोग संतान प्राप्ति के लिए इकट्ठा होते हैं और हर साल सितंबर महीने में बावन द्वादशी के दिन यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है.

आशापुरा को कच्छ की कुलदेवी माना जाता है और बड़ी तादाद में इलाके के लोगों की उनमें आस्था है.
जवानों के लिए आस्था का केंद्र है बनासकांठा के नाडेश्वरी माता का मंदिर

Check Also

विवाह पंचमी के दिन निभाई जाती हैं ये रस्में, भक्ति से सराबोर रहता है माहौल

विवाह पंचमी में राम-जानकी विवाह के दौरान कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस …