भक्त और भगवान की यह कथा पढ़कर आपकी आंखों में भी आ जाएंगे आंसू

guru-purnima-55bb34135ed7f_l-300x214एक बार एक महात्मा अपने शिष्यों के साथ कुम्भ के मेले का भ्रमण कर रहे थे। वहां विचरण करते समय उन्होंने एक साधु को माला फेरते और साधना करते देखा। उन्होंने पाया कि साधु बार-बार आंखे खोलकर देख लेता कि लोगों ने कितना दान दिया है। वो हंसे और आगे बढ़े। 
 
थोड़ी दूर जाकर देखा कि एक पंडितजी भागवत वाचन रहे थे लेकिन उनके चेहरे पर शब्दों के कोई भाव नहीं थे। वे तो बस यंत्रवत बोले जा रहे थे और चेलों की जमात उनके पास बैठी थी। इस पर महात्मा खिलखिलाकर हंस पड़ेे। वे थोड़ा-सा आगे बढ़े ही थे कि देखते हैं एक युवक बड़ी मेहनत और लगन से रोगियों की सेवा कर रहा है। उनके घावों पर मरहम लगा रहा है और उन्हें बड़े प्रेमभाव से सांत्वना दे रहा है। 
 
महात्मा ने उसे देखा तो उनकी आंखें भर आईं और वे भावुक हो गए। जैसे ही महात्मा अपने शिष्यों के साथ अपने आश्रम पहुंचे तो शिष्यों ने गुरु से पहले दो जगह हंसने और एक जगह भावुक होने का कारण पूछा। 
 
गुरु ने कहा, पहली दो जगहों पर तो मात्र आडंबर ही था लेकिन भगवान की प्राप्ति के लिए केवल एक ही आदमी था जो व्याकुल दिखाई दे रहा था। वही व्यक्ति था जो पूरे मनोयोग के साथ लोगों की सेवा कर रहा था। उसकी सेवा भावना को देखकर मेरा मन द्रवित हो गया और मैं सोचने लगा कि जाने कब जनमानस धर्म के सच्चे स्वरूप को समझेगा। मात्र वही एक व्यक्ति था, जो धर्म का महत्व और उसके मर्म को समझ रहा था।
 
साधु बोले कि धर्म की सेवा का कोई विज्ञान या परिभाषा नहीं होती, मानव सेवा ही सही मायनों में धर्म और समाज की सेवा है।  
ये है भटके हुए देवताओं का मंदिर
जानिए ब्रह्मांड के पहले 'पत्रकार' की रोचक कहानी

Check Also

तेरहवीं पर खाना खातें हैं तो आज ही छोड़ दें वरना…

Web_Wing कहते हैं वास्तुशास्त्र एक ऐसा विज्ञान है, जो व्यक्ति के आसपास के वातावरण के …