सावन में शनैश्चरी अमावस्या, सुबह-सुबह उठकर इस मंत्र का करें जप चमक जाएगी किस्मत

शनिवार को शनि अमावस्या है। शनिदेव न्याय के देवता हैं, इसी वजह से भगवान शिव ने उन्हों नवग्रहों में न्यायधीश का काम सौंपा है इसलिए अपनी दशा महादशा में और गोचर जिसे साढ़ेसाती और ढैय्या कहते हैं इस दौरान व्यक्तियों को उनके कर्मों का फल देते हैं। साथ ही शनि अमावस्या के दिन साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है। इस वजह से शास्त्रों में अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए इस दिन शनि के कुछ शक्तिशाली मंत्रों का जप करें, इससे शनिदेव आपकी हर मनोकामना पूरी करेंगे। आइए जानते हैं वह मंत्र क्या हैं….

इस मंत्र से मिलेगी पितृ दोष से मुक्ति
मान्यता है कि आप इस दिन शनि के बीज मंत्र ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का जप करें और इसके बाद उड़द दाल की खिचड़ी दान करें हैं तो शनि और पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है।

इस मंत्र से मिलेगी शनिदेव की कृपा
ग्रहण के समय आप शनिदेव के वैदिक मंत्र ‘ओम शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयोरभि स्रवन्तु न:।।’ का जप करें। इस मंत्र के बाद तिल के तेल से बने पकवान का दान करें। इससे शनिदेव की आप पर कृपा बनी रहेगी।

इस मंत्र से मिलेगी शनिदोष से मुक्ति
ज्योतिषशास्त्र में शनि की दशा को कम करने के लिए शनि पत्नी के नाम की स्तुति जपना भी उपाय माना गया है। उनकी इस स्तुति के बाद आप शमी के पेड़ की भी पूजा कर सकते हैं। शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है।

शनि पत्नी स्तुति
ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहिप्रिया।
कण्टकी कलही चाथ तरंगी महिषी अजा।।

इस मंत्र से होगी मनोकामना पूरी
शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पौराणिक शनि मंत्र: ‘ओम ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।’ का जप करें। इससे शनिदेव महाराज आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगे।

इस मंत्र से साढ़ेसाती का प्रभाव होगा कम
आप कुंडली में मौजूद साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम करने के लिए तांत्रिक शनि मंत्र: ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।’ का जप करें। साथ ही तेल, काला छाता, जूते-चप्पल, कंबल आदि दान करें। इससे ना सिर्फ साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होगा। बल्कि जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होगी।

इस मंत्र के साथ यंत्र की करें पूजा
ग्रहण के समय आप ओम भूर्भुव: स्व: शन्नोदेवीरभि टये विद्महे नीलांजनाय धीमहि तन्नो शनि: प्रचोदयात्। मंत्र का जप करें और शनिदेव की कृपा के प्रात्र बनें। साथ ही मंदिर जाकर पूजा अर्चना करना संभव न हो तो घर में शनि यंत्र की स्थापना करें और पूजन करें।

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