इस वजह से गणपति के पैरों में गिरकर धन देवता कुबेर को मांगनी पड़ी थी माफ़ी

आज गणेश चतुर्थी है. ऐसे में इस पर्व को बहुत धूम धाम से मनाया जाता है. वहीं गणपति के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं और इनमें से एक वह कथा है जिसमें वह कुबेर के यहां भोजन पर गये. जी हाँ, आपको बता दें कि कुबेर यक्षों के राजा थे और कुबेर धन के स्वामी हैं. इसी के साथ कुबेर का शरीर थोड़ा सा विकृत था और वह हर समय तमाम हीरे जवाहरात से लदे रहते थे जिससे उसकी आकृति छिप जाती थी. कहते हैं वह चाहते थे कि शिव भी इसी तरह खूब हीरे जवाहरात पहनें और कुबेर हर रोज नए आभूषण के साथ शिव के पास आते और उनसे कहते, ‘आपको इसे पहनना चाहिए.’ वहीं उनके इस बात के कहने पर शिव कहते, ‘मैं तो बस भस्म ही लगाता हूं. मुझे किसी आभूषण की आवश्यकता नहीं है.’ कुबेर ने पर हार नहीं मानी.

एक दिन शिव ने कहा, ‘अगर तुम वास्तव में मेरे लिए कुछ करना चाहते हो तो मेरे बेटे के लिए करो.’ उसके बाद शिव ने गणेश की ओर इशारा किया और कहा, ‘यह मेरा बेटा है. इसे भोजन पसंद है. इसे घर ले जाओ और भरपेट खाना खिलाओ जिससे उसे संतुष्टि हो जाए.’ जैसे ही भोजन का जिक्र आया, गणेश उठ खड़े हुए और बोले, ‘हां, हां, कहां, कब?’ कुबेर ने गणपति को घर आने का न्योता दिया और गणपति उनके यहां जा पहुंचे. वहीं उसके बाद कुबेर को अपनी धन दौलत और महल का बड़ा घमंड था. गणपति ने गंदे पैरों से ही महल के अंदर प्रवेश किया. इसके कारण उनके पैरों के निशान महल के शानदार संगमरमर के फर्श पर छप गये.

नौकर-चाकर गणेश के पीछे उन निशानों को पोंछते हुए आ रहे थे. कुबेर ने सोचा, ‘आखिर शिव का बेटा है चलो, कोई बात नहीं.’ खैर गणपति महल के अंदर आए और आसन जमा लिया. उन्हें भोजन परोसा गया. गणपति ने भोजन करना शुरू कर दिया. खाना बार-बार बनाया जाता और गणपति उसे खत्म कर जाते. वहीं उस दौरान कुबेर ने कहा, ‘तुम छोटे बच्चे हो. उस हिसाब से तुमने बहुत ज्यादा खा लिया है. इतना भोजन तुम्हारे लिए नुकसानयदायक हो सकता है.’

फिर जवाब में गणपति ने कहा, ‘खतरे की कोई बात नहीं है. मेरी चिंता मत कीजिए. मुझे अभी भी तेज भूख लगी है. आप खाना मंगवाइए. आखिर अपने मेरे पिता को वचन दिया है कि आप मुझे भरपेट खाना खिलाएंगे.’ कुबेर का पूरा खजाना खाली हो गया. सब कुछ बेचकर भोजन की व्यवस्था की गई. फिर भी गणपति का पेट नहीं भरा. उसके बाद गणपति की थाली खाली थी, लेकिन अभी भी वह मिठाइयों का इंतजार कर रहे थे. उन्होंने कहा, ‘खीर कहां है, लड्डू कहां हैं?’ कुबेर बोले, ‘मुझसे गलती हो गई. घमंड में आकर मैंने अपनी संपत्ति की डींगें मार दी. मैं यह जानता हूं कि मेरे पास जो भी है वह सब शिव का ही दिया हुआ है. फिर भी एक मूर्ख की भांति यह सोचकर मैं उन्हें वे तुच्छ आभूषण भेंट करने की कोशिश करता रहा कि मैं उनका परम भक्त हूं.’ वहीं फिर कुबेर गणपति के पैरों में गिर गये और क्षमा याचना करने लगे. कहा जाता है इसके बाद गणपति मुस्कुराते हुए बिना मिठाई खाए ही वहां से चल दिए.

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