बप्पा से सुख-समृद्धि की चाह में कही आप यह गलती तो नहीं कर रहे है

किसी भी शुभ काम को करने से पहले हम श्री गणेश की आराधना करते है। कहा जाता है की किसी भी कार्य को करने से पूर्व ही यदि हम भगवान श्री गणेश की आराधना करते है तो वह कार्य बिना किसी विपदा के सम्पूर्ण होता है। श्री गणेश को सभी देवी देवताओ में सर्वोपरि माना जाता है। इसलिए श्री गणेश की सबसे पहले आराधना की जाती है। कहा जाता है की जहां श्री गणेश का वास होता है उस स्थान पर कभी भी विघ्न नहीं रहते है और वह स्थान धन धान्य से परिपूर्ण होता है। जिस स्थान पर श्री गणेश की नित्य ही आराधना की जाती है उस स्थान पर रिद्घि-सिद्घि का वास होता है और सभी दुख दरिद्रता समाप्त हो जाती है।

वास्तु शाश्त्र के अनुसार जिस घर के मुख्य द्वार पर श्री गणेश की तस्वीर लगाई जाती है।उस घर में रिद्घि-सिद्घि के साथ शुभ लाभ का वास होता है।और वह घर नित्य ही श्री गणेश की छत्रछाया में रहता है। सदियों से चली आ रही परम्परा में लोग अपने घरो के मुख्य द्वार पर श्री गणेश की तस्वीर लगाने के साथ ही उसके आस पास कुमकुम से रिद्धि सिद्धि या शुभ लाभ लिखते है। और कहा जाता है की जिस घर के मुख्य द्वार पर श्री गणेश की प्रतिमा या तस्वीर लगाई जाती है उस स्थान पर कभी भी धन की कमी नहीं होती है और वह घर दिन दुगनी और रात चौगुनी बरकत प्राप्त करता है। लेकिन वास्तु शाश्त्र कहते है की घर की उन्नति के प्रयास में में हम कुछ ऐसा करते है जिससे श्री गणेश की कृपा हम पर नहीं होती है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार कहा जाता है की श्री गणेश की पीठ जिस दिशा में रहती है उस दिशा में दरिद्रता आ जाती है। उस दिशा ने रहने वाले व्यक्ति कभी भी प्रसन्न नहीं रहते है। भारत के हर मंदिर दुकान या घर के मुख्य द्वार पर हमें श्री गणेश की प्रतिमा के साथ उसके आस पास कुमकुम या सिंदूर से रिद्धि सिद्धि या शुभ लाभ लिखा जाता है। यह सब हम प्रभु करपा ,के लिए करते है लेकिन अनजाने में हमें प्रभु कृपा प्राप्त नहीं होती है इसलिए दुकान घर के बहार ऐसी गणेश की तस्वीर लगनी चाहिए जो घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ हमें श्री गणेश के दर्शन हो और गणेश की पीठ हमारे घर के अंदर न हो। जिससे हमें प्रभु कृपा मिलती रहेगी।

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कर्म मे ही छिपा है मानव का धर्म

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